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Music therapy for cows: गायों को पसंद आ रहा ये संगीत, 25% बढ़ा दूध तो व्यवहार में भी हुआ बदलाव

सार

संगीत से गायों का व्यवहार, 'वाइल्ड से माइल्ड' यानी जंगली, अनियंत्रित, आक्रामकता से शांत और सौम्य हो जाता है। कर्नाटक के मुद्देनहल्ली स्थित 'सत्य साई ग्राम' में स्थित 'साई सुधा गोशाला' में गायों पर यह सफल प्रयोग किया गया है। 
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साई सुधा गोशाला के 'चीफ लाइजनिंग ऑफिसर' गोविंद रेड्डी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संगीत, केवल मनुष्यों के स्वभाव पर ही असर नहीं डालता, बल्कि गायों का व्यवहार भी इससे बदल रहा है। खासतौर पर, चारा खिलाते वक्त और दूध निकालते समय, अगर गायों को वाद्य संगीत सुनाया जाए तो वे ज्यादा दूध देती हैं। इतना ही नहीं, म्यूजिक थेरेपी, जिसमें वैदिक संगीत की ज्यादा भूमिका है, ये गायों को दी जाए तो उनके व्यवहार में भी आश्चर्यजनक बदलाव देखने को मिलता है। गायों का व्यवहार, 'वाइल्ड से माइल्ड' यानी जंगली, अनियंत्रित, आक्रामकता से शांत और सौम्य हो जाता है। कर्नाटक के मुद्देनहल्ली स्थित 'सत्य साई ग्राम' में स्थित 'साई सुधा गोशाला' में गायों पर यह सफल प्रयोग किया गया है। 

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साई सुधा गोशाला के 'चीफ लाइजनिंग ऑफिसर' गोविंद रेड्डी से जब पूछा गया कि म्यूजिक थेरेपी से गायों के लालन पालन, उनके व्यवहार और दूध प्रोडेक्शन पर क्या असर पड़ता है। रेड्डी का कहना है कि जिस तरह से मनुष्यों पर जब स्ट्रेस होता है तो उसे दूर करने में संगीत अहम भूमिका निभाता है, इसी तरह गायों पर भी इसका सार्थक असर पड़ता है। रेड्डी ने दावा किया है, संगीत गाय की दूध देने की क्षमता को बढ़ाता है। यह बढ़ोतरी 20 से 25 तक हो सकती है। चारा खिलाते वक्त और दूध निकालते समय, म्यूजिक थेरेपी बहुत कारगर साबित होती है। 

गोशाला प्रबंधन का कहना है कि संगीत गायों के व्यवहार पर भी असर डालता है। हिंसक व्यवहार करने वाली गायों के व्यवहार को संगीत के जरिए कम किया जा सकता है। उन्हें गोशाला में भजन,  वैदिक संगीत और वाद्य संगीत सुनाए जाते हैं। 
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गोविंद रेड्डी ने बताया कि गायों को श्लोक भी सुनाए जाते हैं। हालांकि गायों को वाद्य संगीत ज्यादा पसंद आता है। सुबह चार बजे से साढ़े छह बजे तक और शाम को चार बजे से आठ बजे तक संगीत बजाया जाता है। साई सुधा गोशाला, वर्ष 2020 में स्थापित की गई थी। यह स्थल, 35,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला है। 

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