मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के मुद्दे पर मुर्शिदाबाद के दो सांसदों ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात कर कड़ी आपत्ति जताई। सांसदों ने इसे एक समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश बताते हुए ट्रिब्यूनल में पेंडिंग मामलों को 31 दिसंबर तक सुलझाने की मांग की।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से आए दो टीएमसी सांसदों ने राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। राज्य सचिवालय नबन्ना में हुई इस बैठक में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने का मुद्दा जोर-शोर से उठा। सांसदों का आरोप है कि बंगाल में जान-बूझकर एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।
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सांसदों ने क्या गंभीर सवाल उठाए?
नबन्ना में पत्रकारों से बात करते हुए मुर्शिदाबाद के टीएमसी सांसद अबू तहेर खान ने अपनी चिंता जाहिर की। उनके साथ जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान भी मौजूद थे। खान ने कहा कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेशों का पालन होना चाहिए, लेकिन लाउडस्पीकर हटाना सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की पुलिस इस मामले में जरूरत से ज्यादा उत्साह दिखा रही है।
मुर्शिदाबाद के मुद्दे पर क्या बातचीत हुई?
सांसदों ने केवल लाउडस्पीकर का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि मुर्शिदाबाद के लोगों से जुड़ी अन्य समस्याओं को भी सामने रखा। उन्होंने एसआईआर ट्रिब्यूनल में अटके हजारों मामलों पर मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की मांग की।
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सांसद अबू तहेर खान ने कहा कि मतदाता सूची से नाम कटने के कारण कई असली नागरिकों को परेशानी हो रही है। ट्रिब्यूनल के फैसले में देरी से लोगों के पासपोर्ट सत्यापन, जमीन की रजिस्ट्री और सरकारी योजनाओं का लाभ रुक गया है। सांसदों ने इन मामलों की सुनवाई 31 दिसंबर तक पूरी करने की मांग की।
मुर्शिदाबाद के दोनों सांसदों ने साफ-साफ कहा कि वे धार्मिक स्वतंत्रता और आम जनता के अधिकारों के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।