पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में रविवार को शांति रही। हिंसा के बाद रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और हथियारबंद पुलिस ने शहर में रूट मार्च किया। लगातार दो दिनों तक हुई पत्थरबाजी और आगजनी के कारण दुकानें बंद रहीं और सड़कें सुनसान नजर आईं।
क्या बोले अधिकारी?
एसपी कुमार सन्नी राज खुद स्थिति पर नजर रख रहे हैं। पुलिस कर्मियों ने शहर की मुख्य सड़कों और गलियों में गश्त की और आस-पास के गांवों में फैल गए, जहां अजीब सी शांति छाई हुई थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुख्य सड़कों और गलियों में लोगों को इकट्ठा होने या जमा होने से रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
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क्यों भड़की हिंसा?
यह हंगामा शुक्रवार को शुरू हुआ था। झारखंड में एक स्थानीय मजदूर की मौत हो गई थी। परिवार का आरोप है कि बंगाली बोलने के कारण उसकी हत्या हुई। इसके विरोध में भीड़ ने सड़क और रेलवे ट्रैक जाम कर दिए। शनिवार को बिहार में एक और मजदूर पर हमले की खबर के बाद हिंसा फिर भड़क गई। उपद्रवियों ने गाड़ियों में तोड़फोड़ की और पत्रकारों पर भी हमला किया।
मुख्य आरोपी के साथ हुई कई गिरफ्तारियां
पुलिस ने सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से चार लोगों को विशेष रूप से पत्रकारों पर हमला करने के आरोप में पकड़ा गया है। एसपी ने बताया कि मतिउर रहमान नाम का व्यक्ति मुख्य आरोपी है। वह पिछले दो दिनों से भीड़ को उकसा रहा था। फिलहाल पुलिस अशांति फैलाने वालों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्थिति पर नज़र रख रही है।
पुलिस स्थिति पर रख रही नजर
निलंबित टीएमसी नेता और नवगठित जनता उन्नयन पार्टी के चेयरमैन हुमायूं कबीर ने पुष्टि की है कि रहमान स्थानीय निवासी है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा था या नहीं। फिलहाल पुलिस गांवों और गलियों में गश्त कर रही है, ताकि स्थिति को नियंत्रण में रहे।
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यूसुफ पठान पीड़ित परिवार से मिले
इस सबके बीच मुर्शिदाबाद से टीएमसी सांसद यूसुफ पठान ने रविवार को बेलडांगा में मृतक प्रवासी मजदूर अलाउद्दीन शेख के परिवार से मुलाकात की, जिसकी झारखंड में संदिग्ध मौत के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई थी। पठान ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का भरोसा देते हुए बंगाली मजदूरों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि वह पीड़ितों से नहीं मिलते और बताया कि पार्टी नेतृत्व लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए है। साथ ही, उन्होंने जानकारी दी कि प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू किए हैं और अभिषेक बनर्जी ने इस मुद्दे पर झारखंड सरकार से जांच की मांग की है।
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