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हत्यारों ने पूछा, 'यू आर तंजील... यस... और धांय-धांय'

Wed, 06 Apr 2016 04:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर

सार

  • पूरी तहकीकात करने के बाद ही बरसाईं गोलियां
  • मोहम्मद तंजील पर सारी गोलियां नजदीक से मारी
  • अपने पास कभी कोई हथियार नहीं रखते थे तंजील
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एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
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विस्तार
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एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद के हत्यारों ने पूरी तहकीकात करने के बाद ही गोलियां बरसाईं। शूटरों ने डीएसपी की वैगनआर के आगे बाइक अड़ा दी। शूटरों ने कार चलाने वाले से पूछा कि यू आर मिस्टर तंजील। डीएसपी के यस कहते ही शूटर ने पिस्टल से उन पर ताबड़तोड़ गोलियां दाग दी। मोहम्मद तंजील के मुंह से बस एक शब्द निकला हेड डाउन और पीछे बैठे उनके दोनों बच्चे सीट के नीचे छिप गए।
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मंगलवार को मोहम्मद तंजील के चचेरे भाई मोहम्मद हबीब दिल्ली से गांव सहसपुर आए। उन्होंने बताया कि मोहम्मद तंजील के दोनों बच्चों बेटे शाहबाज और बेटी जिमनिश ने अपने पिता के मर्डर का वाक्या उन्हें विस्तार से बताया। दोनों बच्चों ने उन्हें बताया कि शादी समारोह से चलते ही स्योहारा में लगे गेट से जब उनकी वैगनआर गुजरी, तो सहसपुर की ओर से एक बाइक पर सवार दो लोग आए। दोनों ने बाइक मोड़कर उनकी वैगनआर कार के पीछे लगा दी।

घटनास्थल के पास बाइक वैगनआर के आगे खड़ी कर दी। तंजील वैगनआर चला रहे थे। उनके पास पहुंचकर एक शूटर ने बस इतना मालूम किया यू आर मिस्टर तंजील। दोनों बच्चों ने परिजनों को बताया कि शूटर ने पिस्टल से पहले दो मैगजीन मोहम्मद तंजील और फरजाना पर चलाई। दूसरी मैगजीन के बाद पिस्टल नहीं चलने पर साथी शूटर से दूसरा पिस्टल लिया। इससे मोहम्मद तंजील पर सारी गोलियां नजदीक से मारी। सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद शूटर फरार हो गए।
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वैल क्वालीफाइड थे शूटर

तंजील अहमद - फोटो : amar ujala bureau
दोनों शूटर वैल क्वालीफाइड थे। अंग्रेजी अच्छी बोल रहे थे। बड़े भाई मोहम्मद रागिब की कार मोहम्मद तंजील की कार से करीब चार किलोमीटर पीछे चल रही थी। रागिब ने जब रास्ते में मोहम्मद तंजील की कार को खड़ा देखा, तो सकते में रह गए। रागिब ने जब अपनी कार रोकी. तो दोनों बच्चों ने उन्हें रोते बिलखते  हुए बताया कि मम्मी-पापा को गोली मार दी गई है। इसके बाद ही रागिब बच्चों के साथ कार से मोहम्मद तंजील व उनकी पत्नी फरजाना को कार से अस्पताल ले गए।

चेहरे पर मास्क बांधे थे दोनों शूटर
मोहम्मद हबीब के मुताबिक दोनों शूटरों ने अपने चेहरे पर मास्क लगा रखा था, ताकि उन्हें कोई पहचान न सके। यह बात तंजील के दोनों बच्चों ने ही बताई है। दोनों शूटर मर्डर करने के  बाद अपनी बाइक से सहसपुर की ओर फरार हो गए। दोनों के चेहरे पहचान में नहीं आ रहे थे।

दो तीन महीने में सहसपुर आते थे तंजील
मोहम्मद हबीब ने बताया कि मोहम्मद तंजील दो-तीन महीने में एक बार सहसपुर आते थे। एक दो दिन रुकने के बाद चले जाते थे। गांव में सादगी के साथ रहते थे। किसी से उनकी कोई रंजिश नहीं थी। रिश्तेदारी और परिचितों में दुख या सुख पड़ने पर तंजील जरूर आते थे।

सादा भोजन करने के शौकीन थे
तंजील सादा भोजन करने के शौकीन थे। सहसपुर आकर चटनी, साग व अन्य सब्जी खाना पसंद करते थे। बगड़  की रोटी बेमौसम में भी खाते थे। बगड़ की रोटी उन्हें बेहद पसंद थी। गांव आने पर किसी को नहीं मालूम होता था कि किसलिए वह आए हैं। अपनी बात किसी से शेयर नहीं करते थे।

कभी कोई वैपन नहीं रखते थे तंजील
मोहम्मद हबीब के मुताबिक मोहम्मद तंजील को किसी से अपनी जान का खतरा दिखाई नहीं देता था। कभी उन्होंने ऐसी बात किसी से नहीं बताई। वह अपने पास कभी कोई हथियार नहीं रखते थे। बिना हथियार के ही सहसपुर आते जाते थे। घटना की रात भी उनके पास कोई वैपन नहीं था। वह बेखौफ होकर आया जाया करते थे।
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'पुलिस को बताकर जैसे मैने कोई गुनाह कर दिया'

तंजील अहमद - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
एनआईए अफसर की हत्या के मामले की पुलिस को 100 नंबर पर सबसे पहले सूचना देने वाला व्यक्ति आलम पुलिस के रवैये से सहमा हुआ है। मोबाइल पर कॉल करके पुलिस उसे प्रताड़ित कर रही है। आलम के मुताबिक पुलिस उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रही है, जैसे उसने मदद करके कोई गुनाह कर लिया हो।

मूल रूप से बिहार निवासी आलम सहसपुर की मीट फैक्ट्री में काम करता है। सहसपुर में ही किराए पर वह रहता है। दो अप्रैल को वह फैक्ट्री के काम से मेरठ गया हुआ था। आलम के मुताबिक उसे मेरठ से लौटने में काफी देर हो गई। वह छोटे हाथी से आ रहा था। जैसे ही वह सहसपुर में गिराधारी लाल रोड पर गेट नंबर दो से सहसपुर की सीमा के अंदर घुसा, तो तालाब के पास पुलिया पर दो गाड़ी खडी हुई थी, जिसमें एक लड़की रो रही थी। बच्ची मदद की गुहार लगा रही थी।

आलम के मुताबिक उसने नीचे उतरकर देखा तो एक व्यक्ति और एक महिला खून में लथपथ गाड़ी के अंदर पड़े हुए थे। मदद की गुहार लगा रहे बच्चों ने उससे मदद करने के लिए कहा। इस दौरान यहां पर एक व्यक्ति और एक युवक भी दूसरी गाड़ी के पास खड़ा था। ऐसा लग रहा था कि वे उनके संबंधी है। वहां खड़ा वह व्यक्ति और युवक घायल महिला को वैगनआर से निकालकर दूसरी गाड़ी में शिफ्ट कर रहे थे।

आलम ने बताया वह भी उनके पास मदद के लिए रुक गया और अपने मोबाइल से 100 नंबर पर घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने उससे घटनास्थल का पता पूछा और फोन काट दिया। उसके कुछ मिनट बाद ही दोबारा लौटकर उसे फोन आया। आलम से पूछा गया कि गाड़ी का नंबर क्या है और वे कहां पर खड़े है। आलम के मुताबिक उसने जब पुलिस को गाड़ी का नंबर बताया, तो पुलिस ने कहा कि इंग्लिश मत बोल और सहसपुर चौराहे पर पहुंच और आकर उन्हें जानकारी दे।

आलम ने बताया कि वह इसके बाद डर गया और उसने अपना मोबाइल बंद कर लिया। मानवता के नाते उसने घायल व्यक्ति को चालक सीट से हटाकर उसके बराबर की सीट पर शिफ्ट कराया और घायलों के साथ गाड़ी में बैठकर उन्हें नजदीक के चिकित्सक के पास ले गया। इसके बाद क्या हुआ आलम को नहीं मालूम। अब पुलिस उसके मोबाइल नंबर पर फोन कर रही है। आलम के मुताबिक पुलिस उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रही है, जैसे उसने मदद करके कोई गुनाह कर लिया हो।
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