फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mumbai: 'मुस्लिम पर्सनल लॉ में अब सुधार का समय', सुशील मोदी बोले, देश में लैंगिक समानता जरूरी

Thu, 05 Oct 2023 07:55 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

ओवैसी ने पर्सनल लॉ का बचाव करते हुए कहा कि मुस्लिम व्यक्ति की दूसरी पत्नी गुजारा भत्ता और रहने के लिए अलग घर की हकदार है। उन्होंने कहा कि उसे भरण-पोषण का अधिकार मिलता है, रहने के लिए एक अलग घर मिलता है और उसे पत्नी कहा जाता है।
विज्ञापन
सुशील कुमार मोदी - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को जोर देकर कहा कि लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार का समय आ गया है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) में बहुसंख्यकवादी एजेंडा या अति-आवश्यक सुधार के  विषय पर चर्चा के दौरान यहां एक कॉन्क्लेव में उन्होंने बहुविवाह और तीन तलाक की प्रथाओं का हवाला दिया और कहा कि कानूनों में लैंगिक समानता की जरूरत है। 

विज्ञापन


बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री मोदी ने कहा कि अब मौजूदा मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार लाने का समय आ गया है। मोदी के अलावा, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और महिला अधिकार कार्यकर्ता और वकील फ्लाविया एग्नेस ने भी चर्चा में भाग लिया। 

बीजेपी नेता ने पूछा कि इस तरह के कानून में एक तलाकशुदा महिला, जो अपने पहले पति से दोबारा शादी करने का इरादा रखती है, को पहले शादी करनी होगी और अपनी इच्छा पूरी करने के लिए किसी अन्य पुरुष से तीन तलाक लेना होगा? 
विज्ञापन


क्या बोले ओवैसी
ओवैसी ने पर्सनल लॉ का बचाव करते हुए कहा कि मुस्लिम व्यक्ति की दूसरी पत्नी गुजारा भत्ता और रहने के लिए अलग घर की हकदार है। 

उन्होंने कहा कि उसे भरण-पोषण का अधिकार मिलता है, रहने के लिए एक अलग घर मिलता है और उसे पत्नी कहा जाता है, जबकि अगर कोई हिंदू पुरुष दूसरी पत्नी से शादी करता है, तो उसे पत्नी भी नहीं कहा जाता है। 

लगभग 80 प्रतिशत हिंदु समुदायों में बाल विवाह 
ओवैसी ने आगे दावा किया कि लगभग 80 प्रतिशत बाल विवाह हिंदू समुदायों में होते हैं। फ्लाविया एग्नेस ने सभी कानूनों में लैंगिक न्याय लाने की आवश्यकता के बारे में बात की। 

समान नागरिक संहिता पर, भाजपा सांसद मोदी ने कहा कि इसके पहले मसौदे की देर से जल्दी उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि जब 1955 में हिंदू कोड बिल पेश किया गया था, तो हिंदुओं ने इसका पुरजोर विरोध किया था। उस समय, मुसलमानों की तुलना में हिंदुओं में बहुविवाह अधिक प्रचलित था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें