पॉक्सो केस की सुनवाई के बाद विशेष जज अनीस खान ने मंगलवार को दिए आदेश में कहा, बालिका दुष्कर्म की वजह से गर्भवती हो चुकी थी। उसके भ्रूण का डीएनए टेस्ट हुआ, जिसमें बालिका का सौतेला पिता ही दुष्कर्मी साबित हुआ।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा पीड़िता व उसकी मां भले बयान से पलटे है, लेकिन डीएनए टेस्ट से पुष्टि हुई है। आरोपी परिवार में अकेला कमाने वाला होने की वजह से मां और पीड़िता अपने बयान से पलटे है। मुंबई। एक विशेष अदालत ने 41 साल के व्यक्ति को अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के लिए 20 साल कैद की सजा सुनाई है। खास बात है कि अदालत में गवाही के दौरान 16 साल की पीड़िता व उसकी सगी मां ने दुष्कर्म के आरोप नकार दिए थे लेकिन डीएनए टेस्ट में अपराध की पुष्टि हो चुकी थी, इसलिए अदालत ने न केवल उनकी गवाही को महत्व नहीं दिया, बल्कि इस प्रकार पलटने की वजह भी सामने रखी।
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इस पॉक्सो केस की सुनवाई के बाद विशेष जज अनीस खान ने मंगलवार को दिए आदेश में कहा, बालिका दुष्कर्म की वजह से गर्भवती हो चुकी थी। उसके भ्रूण का डीएनए टेस्ट हुआ, जिसमें बालिका का सौतेला पिता ही दुष्कर्मी साबित हुआ। यह ऐसी विशेष परिस्थिति है, जहां पीड़िता भले ही अदालत में बयान से पलट गई, लेकिन आरोपी का अपराध डीएनए जांच ने साबित किया। इस आदेश की कॉपी बुधवार को जारी हुई, जिसमें जज ने लिखा है, यह बेहद गंभीर और घृणित अपराध है जिसमें 16 साल की बालिका से उसके सौतेले पिता ने दुष्कर्म किया। पीड़िता व उसकी मां बयान से पलट रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आरोप साबित नहीं हुए और और सजा नहीं होगी।
यह वजह बताई
अदालत ने निर्णय में लिखा कि संबंधित परिवार में दुष्कर्मी सौतेला पिता ही इकलौता कमाने वाला सदस्य है। यही वजह है कि पीड़िता व उसकी मां उसे माफ करके जेल से बाहर रखना चाहते हैं। पीड़िता पर उसकी मां मानसिक दबाव भी डालती है, जो उसके बयान में नजर आता है।
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मामला संक्षेप में
जून 2020 में बालिका ने अपनी मां को बताया कि उसका सौतेला पिता उसके साथ अक्तूबर 2019 से दुष्कर्म कर रहा है। मां ने पुलिस केस दर्ज करवाया, चिकित्सकीय जांच में बालिका 16 हफ्ते की गर्भवती मिली। गर्भपात करवा कर भ्रूण का डीएनए टेस्ट किया गया। भ्रूण का डीएनए सौतेले पिता के डीएनए से मैच हो गया।