इस सहकारी बैंक के कुछ संस्थापक सदस्यों ने बताया कि संगिनी बैंक में सिर्फ एक तस्वीर के आधार पर इन सेक्स वर्करों के बैंक खाते खोले जाते थे। बैंक की स्थापना साल 2007 में अमेरिका की एक संस्था से फंड लेकर की गई थी। लेकिन साल 2009 में उस संस्था ने फंड देना बंद कर दिया। इसके बाद इंडिया-800 फाउंडेशन ने बैंक के संचालन की जिम्मेदारी ली। लेकिन कुछ वक्त बाद इंडिया-800 फाउंडेशन संगिनी बैंक से अलग हो गया।
संगिनी बैंक को कोलकाता के सोनागाछी रेड लाइट इलाके में चलने वाले उषा को-ऑपरेटिव बैंक की तर्ज पर शुरू किया गया था। लेकिन 10 साल में ही इस बैंक ने दम तोड़ दिया। कई सेक्स वर्कर कहती हैं कि इस बैंक ने पैसे बचाने में उनकी काफी मदद की। चांद बी कहती हैं कि संगिनी बैंक में कईयों ने तो 65,000 रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक जमा कर लिये थे। यहां 200 से 2000 रुपये रोज कमाने वाली महिलाओं के लिए ये एक बड़ी बचत थी। सेक्स वर्कर तनुजा खान का भी संगिनी बैंक में खाता था। वो अब अपने पैसों को लेकर चिंता में रहती हैं।
तनुजा ने बताया, "हम जो पैसा कमाते हैं, उसे अब सुरक्षित रखना मुश्किल हो गया है। बैंक बंद होने से हमारी तकलीफ बढ़ी है। बिस्तर के पास 500 से हजार रुपये रखेंगे तो उन्हें कोई भी ले जायेगा। इसलिए पैसे कहीं इधर-उधर छिपा कर रखने पड़ते हैं।" अन्य महिलाओं का कहना था कि यहां से कपड़े और बर्तन तक चोरी हो जाते हैं तो खुले में पैसे कैसे रखे जा सकते हैं। बहरहाल, बैंक के बंद होने के पीछे मुख्य वहज थी फंड की कमी। इसकी वजह से अब कमाठीपुरा में कई औरतों को भविष्य की चिंता सताने लगी है।