महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार के विरोध को दरकिनार करते हुए मुंबई में मेट्रो रेल कारशेड की जमीन के लिए नई अधिसूचना जारी कर दी है। साथ ही, मेट्रो कारशेड बनाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। इससे राज्य व केंद्र के बीच शुरू जमीन विवाद में नया मोड़ आ गया है।
महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार ने कांजुरमार्ग में मेट्रो कारशेड बनाने की अपनी योजना को गति देने के लिए 43.76 हेक्टेयर जमीन के आरक्षण में बदलाव कर नई अधिसूचना जारी की है। इससे मेट्रो कारशेड बनाने में आ रही अड़चन दूर होने की बात कही जा रही है। महाविकास आघाड़ी सरकार ने पूर्ववर्ती फडणवीस सरकार के एक फैसले को आधार बनाते हुए कांजुरमार्ग की जमीन पर मेट्रो कारशेड बनाने पर आक्रामक तरीका अपनाया है।
दरअसल, फडणवीस सरकार ने 8 मई 2018 को अधिसूचना जारी कर बृहन्मुंबई विकास योजना के अंतर्गत विकास नियंत्रण व प्रोत्साहन नियमावली 2034 को मंजूरी दी थी। इसके तहत विकास योजना में उक्त जमीन उद्यान, स्कूल, बेघरों के लिए घर, पुलिस थाना, पुलिसकर्मियों के लिए घर आदि के लिए आरक्षित किया गया था। अब ठाकरे सरकार ने इस आरक्षण में परिवर्तन कर नई अधिसूचना जारी की है जिससे इस जमीन का उपयोग मेट्रो कारशेड के निर्माण के लिए हो सकेगा।
इधर, भाजपा के पूर्वमंत्री आशिष शेलार ने इस जमीन को लेकर महाविकास आघाडी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पर्यावरणमंत्री आदित्य ठाकरे को खुली चर्चा की चुनौती दी है। भाजपा विधायक शेलार ने सवाल किया कि क्या ठाकरे सरकार नमक की जमीन पर अप्रत्यक्ष तरीके से 50 हजार करोड़ रुपये की जमीन के हस्तांतरण में कांग्रेस के साथ गोरखधंधे में शमिल है। मुख्यमंत्री ठाकरे को पत्र लिखा है कि कांजुरमार्ग की जमीन राज्य की नहीं बल्कि केंद्र सरकार की है। वर्ष 1983 में सबसे पहले केंद्र ने यह दावा किया था।