मुंबई के पवई इलाके में बुधवार को हुई बंधक कांड की घटना ने पूरे महाराष्ट्र को हिला दिया। ठेकेदार रोहित आर्य ने एक स्टूडियो में 17 बच्चों और दो वयस्कों को बंधक बना लिया, जिसके बाद पुलिस ने घंटों की कोशिश के बाद सभी को सुरक्षित छुड़ा लिया। इस दौरान मुठभेड़ में रोहित आर्य को गोली लगी और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। कांग्रेस ने इस मामले में सरकार से कई सवाल उठाए है।
रोहित आर्य लंबे समय से भुगतान में देरी से परेशान था। उसने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। बुधवार को उसने ऑडिशन के बहाने बच्चों को स्टूडियो में बुलाया और वहां बंधक बना लिया। मौके से पुलिस ने रासायनिक पदार्थ और एयर गन बरामद की। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति का गुस्सा नहीं, बल्कि सरकारी वित्तीय अव्यवस्था का खतरनाक नतीजा है।
सरकार की गलती से बच्चों पर आया खतरा- विजय वडेट्टीवार
विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने घटना पर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि राज्य सरकार की वित्तीय गैरजिम्मेदारी ने मासूम बच्चों को खतरे में डाल दिया। सरकार किसानों का कर्ज माफ नहीं करती, ठेकेदारों के बिल रोक देती है और परिणामस्वरूप लोग अपनी जान दे रहे हैं। अब यह गैरजिम्मेदारी बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ी है।
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सरकार की नाकामी से हुआ ये मामला
वडेट्टीवार ने पूछा कि यदि आज कोई मासूम बच्चा मर जाता तो जिम्मेदारी कौन लेता तत्कालीन शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर या महायुति सरकार? उन्होंने कहा कि यह मामला सरकार की नैतिक और प्रशासनिक नाकामी का प्रतीक है।
कानून व्यवस्था चरमरा चुकी है- कांग्रेस नेता भाई जगताप
कांग्रेस नेता भाई जगताप ने कहा कि यह घटना बताती है कि मुंबई और महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। दिनदहाड़े बच्चों को बंधक बना लेना यह दर्शाता है कि प्रशासन नियंत्रण खो चुका है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। जगताप ने आगे कहा कि सरकार की संवेदनहीनता और अवसरवादी राजनीति ने राज्य को अराजकता की स्थिति में पहुंचा दिया है।
क्या बोले एमएनएस नेता बाला नंदगांवकर?
एमएनएस नेता बाला नंदगांवकर ने मामले पर कहा कि अगर उसने पुलिस पर गोली चलाई है, तो पुलिस एनकाउंटर करेगी। इसकी जांच भी हो जाएगी।
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पुलिस ने दिखाई तत्परता, सभी बच्चे सुरक्षित निकाले गए
मुंबई पुलिस ने बहादुरी और त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी 19 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि आरोपी ने बच्चों को ‘ऑडिशन’ के बहाने बुलाया था। पुलिस ने अंदर घुसकर ऑपरेशन शुरू किया, जिसके दौरान रोहित आर्य ने विरोध करते हुए खुद पर हमला करने की कोशिश की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और बाद में अस्पताल में ‘ब्रॉट डेड’ घोषित किया गया। फिलहाल पुलिस उसकी पृष्ठभूमि, मानसिक स्थिति और शिक्षा विभाग के साथ हुए अनुबंधों की जांच कर रही है।