मुंबई के ईएसआईसी अस्पताल में लगी आग के दौरान स्विगी के एक डिलीवरी ब्वाय ने अपने जान की बाजी लगाकर करीब 10 मरीजों की जान बचाई। हालांकि इस दौरान वह धुएं की चपेट में आ गया जिससे उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है। फिलहाल, उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
स्विगी कर्मचारी सिद्धू हनुमानाबाड़े खाना पहुंचाने जा रहा था। जब वह अस्पताल से गुजर रहा था तो उसने ईएसआईसी अस्पताल के ऊपरी तल पर धुआं निकलते हुए देखा। उसने अपनी मोटरसाइकिल खड़ी की और दमकलकर्मियों के साथ मिलकर अधिकारियों की अनुमति से लोगों को बचाने में उनकी मदद करने लगा।
वह दमकलकर्मियों की सीढ़ियों से इमारत के चौथे तल पर पहुंचा और वहां से कुछ मरीजों व आगंतुकों को सुरक्षित बाहर निकाला। सिद्धू ने बहादुरी दिखाते हुए घने धुएं से भरी जगह में प्रवेश किया और दो घंटे में 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि दमघोटू धुएं के कारण वह बेहोश हो गए थे।
पिछले 10 साल में आग की 84 हजार घटनाओं में 600 से ज्यादा लोगों की मौत
मुंबई के ईएसआईसी अस्पताल में लगी आग के बाद शिवसेना ने एक बार फिर बीजेपी नेतृत्व वाली केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। शिवसेना ने बुधवार को दावा किया कि मुंबई में पिछले 10 साल में आग की 84 हजार घटनाएं हुई हैं और इनमें 600 से ज्यादा लोगों की जान गई है। पार्टी ने राज्य सरकार पर इस तरह की घटनाओं से निपटने की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र की संपादकीय में लिखा है कि जिस अस्पताल पर लोगों का जीवन बचाने की जिम्मेदारी होती है, वही ‘प्रशासनीय लापरवाही’ की वजह से मरीजों के लिए ‘यमराज’ बन गया। इस बीच, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि कामगार अस्पताल अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के बगैर चल रहा था, इसलिए राज्य और केंद्र सरकार इसके लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं।