क्या मुंबई के एलफिंस्टन रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे को टाला जा सकता था। यह एक ऐसा सवाल है जो इन दिनों सोशल मीडिया पर खुब वायरल हो रहा है। वहीं इस हादसे में साफ तौर पर लोकल रेलवे प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। एलफिंस्टन रेलवे स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज को चौड़ा करने का आदेश 2016 में जारी कर दिया गया था, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया।
महज 12 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को लागू करने में 18 महीनों की देरी क्यों हुई। गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट को पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु के कार्यकाल में 2016-17 के बजट में ही मंजूरी दे दी गई थी।
दुर्घटना के बाद पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान 2015 में एलफिंस्टन स्टेशन में फुट-ओवर ब्रिज के चौड़ीकरण को मंजूरी दे दी थी। रेलवे प्रशासन की लापरवाही के कारण इसका टेंडर जारी नहीं हुआ था। हालांकि प्रभु के इस बयान के बाद कई सवाल खड़े होते हैं।
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सवाल उठता है कि प्रभु जोकि हाल के दिनों तक रेल मंत्री थे, उन्होंने इस बात पर ध्यान क्यों नहीं दिया कि यह प्रोजेक्ट अभी तक शुरू नहीं हुआ है। वहीं रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि संबंधित जीएम को रेलवे बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी नहीं मिली थी।
गौरतलब है कि 29 सितंबर को हुए इस हादसे में 22 लोगों ने जान गंवा दी वहीं 39 लोग जख्मी हुए। अब सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे पोस्ट देखे जा रहे हैं जिन पर अगर प्रशासन पहले एक्शन ले लेता तो हादसे को टाला जा सकता था।