मुंबई में एक बुजुर्ग कारोबारी साइबर अपराधियों के ऐसे जाल में फंस गए, जिसमें उन्हें लंबे समय तक जांच के नाम पर मानसिक दबाव में रखा गया। केंद्रीय एजेंसियों से अलर्ट मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें आगाह करने की कोशिश भी की, लेकिन ठगों के डराने-धमकाने के कारण उन्होंने किसी पर भरोसा नहीं किया। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर दिए।
दिल्ली पुलिस की ओर से मिले इनपुट के आधार पर केंद्रीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने मुंबई पुलिस को एक संभावित साइबर ठगी का अलर्ट भेजा था। सूचना मिलते ही साइबर पुलिस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम लगातार दो दिन तक अंधेरी पश्चिम स्थित 73 वर्षीय एक कारोबारी के घर पहुंची और उन्हें सावधान करने की पूरी कोशिश करती रही। लेकिन 'डिजिटल अरेस्ट' के खौफनाक जाल में फंसे बुजुर्ग ने वर्दीधारी पुलिसकर्मियों पर भी भरोसा नहीं किया।
विज्ञापन
वे बार-बार यही कहते रहे कि उनके साथ कोई धोखाधड़ी नहीं हुई है और उन्होंने दरवाजा तक खोलने से साफ इनकार कर दिया। आखिर में, दो दिन बाद जब उनके बैंक खाते पूरी तरह खाली हो गए और ठगों ने उन पर कर्ज लेकर और पैसे भेजने का दबाव बनाया, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ और वे बदहवास हालत में साइबर पुलिस स्टेशन पहुंचे।
मुंबई के अंधेरी पश्चिम में रहने वाले इस बुजुर्ग कारोबारी से शातिर साइबर ठगों ने फर्जी 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर कुल 7 करोड़ 90 लाख रुपये ऐंठ लिए। ठगों ने उन्हें करीब दो सप्ताह तक अपने डिजिटल नियंत्रण में रखा और तथाकथित जांच के नाम पर छह अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवा ली। शिकायत मिलते ही हरकत में आई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 1 करोड़ 10 लाख रुपये तुरंत फ्रीज करवा दिए हैं। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ कि ठगी की इस रकम को अलग-अलग जगह ट्रांसफर करने के लिए देश के पांच राज्यों में फैले करीब 200 फर्जी (म्यूल) बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था।
विज्ञापन
इस पूरे मामले का सबसे दुखद और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जब असली मुंबई पुलिस खुद पीड़ित को आगाह करने उनके दरवाजे पर पहुंची थी, तब भी उन्होंने पुलिस की बात पर यकीन नहीं किया। यदि उस समय वे पुलिस की चेतावनी मान लेते और दरवाजा खोल देते, तो उनकी जीवनभर की करोड़ों रुपये की जमा-पूंजी डूबने से बचाई जा सकती थी।
मुंबई पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित को 5 जुलाई की सुबह एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए दावा किया कि जेट एयरवेज के पूर्व प्रमुख नरेश गोयल से जुड़े करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके पहचान पत्रों का गलत इस्तेमाल हुआ है। ठगों ने अपने व्हाट्सएप प्रोफाइल पर पुलिस की वर्दी वाली तस्वीर लगा रखी थी और बुजुर्ग को फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजकर बुरी तरह डरा दिया था। साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें इस बारे में किसी से भी बात न करने की सख्त ताकीद की गई थी। इसी डर और असहनीय मानसिक दबाव में आकर बुजुर्ग ने अपनी पूरी जिंदगी की गाढ़ी कमाई ठगों के बताए खातों में एक-एक कर भेज दी।