यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शीर्ष अदालत ने बांबे हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार नहीं रखा है, क्योंकि 2016 में लाए गए कानून के पीछे पवित्र मकसद था। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी प्रावधान में संशोधन क्यों किए? क्या ये प्रावधान असंवैधानिक थे या हम अपना पक्ष प्रभावी तरीके से नहीं रख पाए? विधेयक को फुलप्रूफ नहीं बनाना सरकार की विफलता है। -अनिल परब, वरिष्ठ शिवसेना नेता
हम अदालत के निर्णय के पालन के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसका सम्मान करते हैं। लेकिन इस निर्णय के दायरे में रहकर भी सरकार सतर्कता बरतेगी कि डांस बार के नाम पर किसी तरह की अवैध गतिविधि संचालित नहीं की जाए। -रंजीत पाटिल, गृह मंत्री, महाराष्ट्र सरकार
एनसीपी और सरकार आमने-सामने
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के पीछे महाराष्ट्र सरकार और डांस बार मालिकों के बीच हुए गठबंधन का हाथ है। जब हम सत्ता में लौटेंगे तो डांस बार पर दोबारा प्रतिबंध लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और डांस बार मालिकों के बीच उनके पूर्व अधिकृत आवास ‘वर्षा’ पर मुलाकात होने के बाद शीर्ष अदालत में मुकदमे की पैरवी हल्की कर दी गई। करीब ढाई साल पहले इसी मुद्दे पर कुछ भाजपा नेताओं और बार मालिकों के बीच मुंबई के मेयर के दादर स्थित बंगले पर भी मुलाकात हुई थी। -नवाब मलिक, राष्ट्रीय प्रवक्ता, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी
जब बिल का ड्राफ्ट पेश किया गया था, तो सभी पार्टियों के प्रतिनिधि मौजूद थे। तीन बैठक आयोजित की गई, जिनमें एनसीपी नेता अजित पवार, धनंजय मुंडे भी शामिल हुए। ऐसे में एनसीपी कैसे इस तरह के भद्दे आरोप लगा सकती है, जबकि वह खुद कानून बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा थी? -नीलम गोरहे, प्रवक्ता, शिवसेना
वेश्यावृत्ति के लिए बड़ी आड़
- डांस बार के व्यवसाय में सबसे बड़ा हिस्सा इसकी आड़ में चलने वाली वेश्यावृत्ति का था
- 90 से 94 हजार करोड़ रुपये तक यानी तकरीबन आधे धंधे का लेनदेन होता था वेश्यावृत्ति के जरिए
- जिस्मफरोशी के बदले में होने वाले भुगतान के साथ बार में उड़ाए जाती थी बड़ी रकम
- ग्राहकों की तरफ से लड़कियों के लिए खरीदे जाते थे करोड़ों रुपये के कपड़े, मेकअप का सामान व तोहफे