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मुंबईः मेट्रो कारशेड विवाद की चपेट में आई पीएम मोदी के सपनों की बुलेट ट्रेन

Sat, 19 Dec 2020 12:15 AM IST
Amit Mandal सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई

सार

अब बीकेसी में बुलेट ट्रेन टर्मिनल की जगह मेट्रो कारशेड बनाना चाहती है ठाकरे सरकार
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बुलेट ट्रेन (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों की बुलेट ट्रेन अब मुंबई में मेट्रो-3 कारशेड विवाद की चपेट में आ गई है। कांजुरमार्ग में मेट्रो कारशेड के निर्माणकार्य पर रोक संबंधी हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य की ठाकरे सरकार बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स (बीकेसी) में प्रस्तावित बुलेट ट्रेन टर्मिनल के स्थान पर मेट्रो कारशेड बनाने की संभावनाएं तलाश रही है।भाजपा नेता व पूर्व मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि सरकार का यह प्रस्ताव बुलेट ट्रेन परियोजना के खिलाफ है।

दरअसल, मेट्रो कारशेड के मामले में राज्य सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इसे निजी हार के रूप में देख रहे हैं। इससे मुंबई में मेट्रो रेल कारशेड का मामला एक तरह से मोदी बनाम ठाकरे की लड़ाई मे तब्दील होता दिखाई दे रहा है। इस बीच शुक्रवार को राज्य के शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुंबई के लोगों के लिए मेट्रो बहुत जरूरी है। अदालत के फैसले के बाद हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या मेट्रो कारशेड बीकेसी में बनाया जा सकता है। शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार ने अधिकारियों को बीकेसी में बुलेट ट्रेन के लिए प्रस्तावित स्टेशन के स्थान पर मेट्रो कारशेड बनाने की संभावनाएं तलाशने करने का आदेश दिया है। हालांकि उद्धव सरकार यह अच्छी तरह जानती है कि बीकेसी में मेट्रो कारशेड बनाने से न केवल राजनीतिक विवाद बढ़ेगा बल्कि मेट्रो के साथ बुलेट ट्रेन परियोजना भी प्रभावित होगी। फिरभी टकराव मोल लेने को तैयार है।

सरकार की सोच हास्यास्पद और बचकाना है- फडणवीस

पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेन्द्र फडणवीस ने बीकेसी में मेट्रो कारशेड बनाने की सोच को हास्यास्पद और बचकाना करार दिया है। उन्होंने कहा कि बीकेसी की जमीन बहुत महंगी है। पिछली बार यहां 1800 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से जमीन बिकी थी। अगर कारशेड के लिए 25 हेक्येटर जमीन ली जाती है तो उसकी कीमत करीब 30,000 करोड़ रुपये होगी। बुलेट ट्रेन टर्मिनल तीन लेबल जमीन के नीचे जा रहा है और जमीन पर सिर्फ 500 मीटर की जगह लेगा। टर्मिलन इस तरह डिजाइन किया गया है कि वित्तीय केंद्र की इमारत उसके ऊपर बनेगी। अगर, मेट्रो कारशेड को जमीन के नीचे बनाया जाएगा तो 500 करोड़ की जगह 5000 करोड़ से भी ज्यादा लागत आएगी और उसका रखरखाव खर्च पांच गुना ज्यादा हो जाएगा। इससे पूरी मेट्रो नॉन फिजिबल हो जाएगी। मुझे पता नहीं सरकार को डुबोने की ऐसी सलाह कौन दे रहा है।

क्या है मेट्रो रेल कारशेड विवाद

मुंबई मेट्रो-3 परियोजना की शुरुआत 2014 में भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समय में हुई थी। यह परियोजना 2021 में पूरी होनी है। इसके लिए ही गोरेगांव के आरे कॉलोनी में कारशेड तैयार किया जा रहा था, लेकिन उद्धव ठाकरे सरकार ने इसको कांजुरमार्ग में स्थांतारित कर दिया। इसके बाद से कारशेड विवादों में आया और मामला कोर्ट में पहुंच गया। बुधवार को बांबे हाईकोर्ट ने मुंबई उपनगरीय जिला कलेक्टर के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसके तहत मेट्रो कार शेड के निर्माण के लिए कांजुरमार्ग में 102 एकड़ साल्ट पैनलैंड (नमक की जमीन) आवंटित की गई थी। 

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