बॉम्बे हाईकोर्ट ने पड़ोस में रहने वाली चार साल के बच्चे का यौन उत्पीड़न करने के दोषी ठहराए बुजुर्ग दंपती को जमानत दे दी। पिछले महीने विशेष कोर्ट ने दंपती को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए दस साल की सजा सुनाई थी। जस्टिस रेवती मोहिते डेरे की एकल पीठ ने पिछले हफ्ते 87 वर्षीय अश्विन व 81 वर्षीय विमलाबेन पारिख को जमानत देते हुए कहा, ऑन रिकॉर्ड सुबूतों में कई विसंगतियां थीं।
पिछले महीने विशेष कोर्ट ने सुनाई थी दस साल की सजा
हाईकोर्ट के 8 अप्रैल को पारित आदेश के मुताबिक, सितंबर 2013 में पीड़ित स्कूल से लौटने के बाद दंपती के घर गया था, जहां उन्होंने उसका यौन उत्पीड़न किया। बच्चे की मां ने उसी शाम पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। दंपती के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है।
पीड़ित की मां ने पहले पुलिस को बयान दिया था कि अश्विन व विमलाबेन दोनों ने बच्चे का उत्पीड़न किया। बाद में कोर्ट में कहा कि सिर्फ अश्विन ने बच्चे को गलत तरीके से छुआ। इस पर कोर्ट ने कहा कि सुबूतों में कई विसंगतियां हैं। विशेष कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी जमानत पर थे और इस दौरान उन्होंने इसका दुरुपयोग नहीं किया। कोर्ट ने दंपती को 25 हजार के मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया।