केंद्र सरकार की तरफ से क्लाउड कंप्यूटिंग को लेकर नियमों में संभावित बदलाव से अमेजन, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियों को करारा झटका लग सकता है। दरअसल सरकार की तरफ से क्लाउड कंप्यूटिंग नीति का पुनरीक्षण कर रहे विशेषज्ञों के एक पैनल ने देश में एकत्र किए गए डाटा को यहीं पर सर्वर बनाकर स्टोर करने की सिफारिश करने जा रहा है। यही सिफारिश क्लाउड कंप्यूटिंग सेवा उपलब्ध कराने वाली इन कंपनियों को परेशान कर रही है।
इन्फोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन की अगुआई वाला पैनल अपनी सिफारिशों की रिपोर्ट 15 सितंबर तक सरकार को सौंप देगा। इस सिफारिश को यदि सरकार ने मान लिया तो इन कंपनियों को अपने सर्वर भारत में बनाने का खर्च उठाना पड़ेगा और साथ ही इसके लिए बड़े पैमाने पर स्टाफ भी रखना होगा।
अगर ऐसा होता है तो डाटा सर्विस महंगी होगी। इसका सीधा प्रभाव ग्राहकों पर भी पड़ेगा, क्योंकि इस पर होने वाले खर्च को वसूलने के लिए कंपनियों को अपने ग्राहकों पर ही इसका बोझ डालना होगा। माना जा रहा है कि इसका असर देश में शुरू हुए छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स को ज्यादा प्रभावित करेगा, जिनका बजट इस सर्विस के लिए बहुत कम है। हालांकि बड़े कॉरपोरेट भी इससे प्रभावित होंगे, लेकिन उन पर बहुत ज्यादा असर होने की संभावना नहीं है।
वहीं, आईटी मिनिस्ट्री के प्रवक्ता ने बताया कि रिपोर्ट अभी मिली नहीं है। रिपोर्ट मिलने के बाद मंत्रालय के समीक्षा कर लेने पर ही वह टिप्पणी करेंगे। ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पब्लिक क्लाउड सर्विस का मार्केट 2022 तक बढ़कर 7 अरब डॉलर का हो जाएगा जो अभी के मार्केट का दोगुना होगा।