लखनऊ की सियासी गहमा गहमी दिल्ली पहुंच गई। जिले के सियासी दिग्गज अखिलेश यादव के साथ हैं। राज्यसभा सदस्य जावेद अली खां ने खुलकर अखिलेश यादव की पैरवी की है। कैबिनेट मंत्री नवाब इकबाल महमूद भी अखिलेश यादव के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इस बीच जिले के सियासी दिग्गज भी लखनऊ से दिल्ली पहुंच चुके हैं।
दिल्ली में मौजूद राज्यसभा के सदस्य जावेद अली खां ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पार्टी में किसी को रखने और निकालने का हक अब मुलायम सिंह यादव के पास नहीं है। क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं।
नरेश अग्रवाल और किरणमय नंदा को मुलायम सिंह यादव द्वारा पार्टी से निकाले जाने को लेकर पूछे सवाल के जवाब में राज्यसभा सदस्य जावेद अली खां ने यह प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में मुलायम सिंह यादव को सर्व सम्मति से संरक्षक बनाया गया है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव चुने गए हैं। किसी को पार्टी में लेने और निकालने का हक अब मुलायम सिंह यादव को नहीं है। यह काम राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का है। हां पार्टी में मुलायम सिंह यादव का दर्जा अभिभावक और संरक्षक की तरह रहेगा।
लोग पार्टी के चुनाव निशान को ताबीज समझ कर दावेदारी कर रहे हैं
पार्टी में छिड़े घमासान पर उन्होंने, शिवपाल यादव पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी के चुनाव निशान को ताबीज समझ कर दावेदारी कर रहे हैं उन्हें एक बात जान लेना चाहिए कि पार्टी लोगों से बनती है। लोग अखिलेश यादव के साथ हैं।
उन्होंने कहा कि दो-ढाई महीने से जो कुछ भी चल रहा था वो अच्छा नहीं था। पार्टी में डेमोक्रेसी को खत्म करके शिवपाल यादव, नेता जी का नाम लेकर पार्टी के वफादारों और बड़े नेताओं को भी हैसियत बताया करते थे। अब हैसियत बताने वालों को खुद की हैसियत पता लग गई होगी। पार्टी के 200 से ज्यादा विधायक, सभी सांसद, पदाधिकारी तथा कार्यकर्ताओं के साथ आम जनता पूरी तरह से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ है।
पार्टी के अधिवेशन में उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जा चुका है। मुलायम सिंह यादव पार्टी के संरक्षक हैं और अभिभावक हैं। उनका सम्मान पार्टी में है आगे भी बना रहेगा। जहां तक पार्टी के चुनाव चिह्न का सवाल है। जहां पार्टी का बहुमत है, चुनाव चिह्न भी वहीं रहेगा लेकिन कुछ लोग पार्टी के चुनाव चिह्न को ताबीज समझकर दावेदारी कर रहे हैं।
ऐसे लोगों पर मैं क्या कमेंट करूं। लोगों का समूह जब एक विचारधारा के साथ संगठित होता है तब राजनीतिक पार्टी बनती है। इस समाजवादी विचारधारा के लोगों का समूह अखिलेश यादव के साथ पार्टी बनकर खड़ा हुआ है।