मुलायम सिंह यादव और उनके पुराने साथी अमर सिंह की चिट्ठी ही अखिलेश यादव खेमे के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हुई। दरअसल, चुनाव आयोग ने दोनों की चिट्ठियों को आधार मानते हुए मुलायम सिंह खेमे की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि समाजवादी पार्टी में कोई टूट नहीं हुई है। मुलायम खेमा आयोग के सामने बार-बार टूट नहीं होने का दावा कर रहा था इसलिए विधायकों, सांसदों, विधान परिषद सदस्यों की संख्या संबंधी हलफनामा देने का कोई सवाल नहीं उठता।
मुलायम खेमे का कहना था कि अखिलेश खेमे के हलफनामे फर्जी हैं। मृत और कोमा में गए लोगों के नाम हलफनामे में दिए गए हैं। मगर मुलायम ने 30 दिसंबर, 2016 और अमर सिंह ने तीन जनवरी, 2017 को चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी में समाजवादी पार्टी में टूट के साफ संकेत दिए थे।
सिब्बल ने भी इन्हीं चिट्ठी को आधार मानते हुए मुलायम खेमे के पार्टी में टूट नहीं होने के दावे को खारिज किया था। चुनाव आयोग को मुलायम सिंह की 30 दिसंबर को लिखी चिट्ठी में पार्टी के टूट की बात कही गई थी। वहीं मुलायम सिंह की ओर से आयोग को लिखी अमर सिंह की चिट्ठी में साफ साफ अखिलेश खेमे को ‘टूट कर अलग हुआ समूह’ कहा गया था।