मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस को छोड़ने का ऐलान कर पार्टी और ममता बनर्जी से बीस साल से ज्यादा पुराना रिश्ता तोड़ लिया। 17 दिसंबर 1997 को जब TMC बनी तो मुकुल रॉय ममता बनर्जी के साथ थे। 1990 में जब ममता ने कांग्रेस छोड़ने का फैसला लिया तब भी मुकुल उनके साथ थे। उन दिनों से ही मुकुल बिना किसी संदेह के ममता ने नंबर दो बन गए।
नंदीग्राम और सिंगूर घटनाक्रम में मुकुल मजबूती से ममता के साथ खड़े रहे। लेकिन आखिर में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। जानिए मुकुल राजनीति में आने से पहले क्या थे और ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने उस पार्टी को छोड़ने का फैसला कर लिया जिसको उन्होंने ही खड़ा किया था-
राजनीति में आने से पहले मुकुल कॉन्ट्रेक्टर थे और बिजली के सामान का बिजनेस भी करते थे। उनके पिता रेलवे में थे। परिवार वाले बताते हैं कि मुकुल पढ़ाई में काफी अच्छे थे और हमेशा टॉप पांच में शामिल रहे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने राजनीति में रुचि लेनी शुरू की।
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मुकुल के परिवार में इससे पहले कोई राजनीति में नहीं आया था। परिवार वाले भी उनके इस फैसले से खुश नहीं थे क्योंकि वह पढ़ाई के अलावा खेलों में भी अच्छे थे। वह क्रेकेट और बैडमिंटन खेलते थे और दोनों के लिए डिस्ट्रिक्ट लेवल पर खेले भी थे।
मुकुल के बेटे शुभ्रांशु भी TMC में ही हैं। वह बीजपुर से विधायक हैं। शुभ्रांशु बताते हैं कि उनके पिता ने पार्टी के लिए काफी कुछ किया। पिता के पार्टी छोड़ने के बावजूद शुभ्रांशु फिलहाल पार्टी में ही रहेंगे।
मुकुल रॉय के कंधों पर पार्टी की काफी जिम्मेदारी थी। चुनावी रणनीति बनाने के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों में पार्टी के प्रचार-प्रसार का जिम्मा भी उनपर ही था। पार्टी में रहते हुए मुकुल ने वक्त-वक्त पर अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। वह पार्टी के महासचिव रहे। रेल मंत्री बने, पार्टी के उपाध्यक्ष भी बनाए गए।