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मुकुल रॉय, जिनके लिए मोदी से टकरा गईं थीं ममता, जानिए एक झटके में क्यों हुए बाहर?

Tue, 26 Sep 2017 12:28 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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mukul roy
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मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस को छोड़ने का ऐलान कर पार्टी और ममता बनर्जी से बीस साल से ज्यादा पुराना रिश्ता तोड़ लिया। 17 दिसंबर 1997 को जब  TMC बनी तो मुकुल रॉय ममता बनर्जी के साथ थे। 1990 में जब ममता ने कांग्रेस छोड़ने का फैसला लिया तब भी मुकुल उनके साथ थे। उन दिनों से ही मुकुल बिना किसी संदेह के ममता ने नंबर दो बन गए।
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नंदीग्राम और सिंगूर घटनाक्रम में मुकुल मजबूती से ममता के साथ खड़े रहे। लेकिन आखिर में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। जानिए मुकुल राजनीति में आने से पहले क्या थे और ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने उस पार्टी को छोड़ने का फैसला कर लिया जिसको उन्होंने ही खड़ा किया था-

राजनीति में आने से पहले मुकुल कॉन्ट्रेक्टर थे और बिजली के सामान का बिजनेस भी करते थे। उनके पिता रेलवे में थे। परिवार वाले बताते हैं कि मुकुल पढ़ाई में काफी अच्छे थे और हमेशा टॉप पांच में शामिल रहे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने राजनीति में रुचि लेनी शुरू की। 
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यह भी पढ़ें: तृणमूल कांग्रेस ने मुकुल रॉय को 6 साल के लिए पार्टी से किया सस्पेंड

मुकुल के परिवार में इससे पहले कोई राजनीति में नहीं आया था। परिवार वाले भी उनके इस फैसले से खुश नहीं थे क्योंकि वह पढ़ाई के अलावा खेलों में भी अच्छे थे। वह क्रेकेट और बैडमिंटन खेलते थे और दोनों के लिए डिस्ट्रिक्ट लेवल पर खेले भी थे।

मुकुल के बेटे शुभ्रांशु भी TMC में ही हैं। वह बीजपुर से विधायक हैं। शुभ्रांशु बताते हैं कि उनके पिता ने पार्टी के लिए काफी कुछ किया। पिता के पार्टी छोड़ने के बावजूद शुभ्रांशु फिलहाल पार्टी में ही रहेंगे।

मुकुल रॉय के कंधों पर पार्टी की काफी जिम्मेदारी थी। चुनावी रणनीति बनाने के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों में पार्टी के प्रचार-प्रसार का जिम्मा भी उनपर ही था। पार्टी में रहते हुए मुकुल ने वक्त-वक्त पर अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। वह पार्टी के महासचिव रहे। रेल मंत्री बने, पार्टी के उपाध्यक्ष भी बनाए गए।
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जब घोटालों में आया मुकुल का नाम

मुकुल राय - फोटो : फाइल फोटो
मुकुल से शारदा चिट फंड स्कैम और नारदा स्टिंग केस में पूछताछ हुई। दोनों मामलों को ही ममता-मुकुल के बीच आई दूरियों की मुख्य वजह बताया जाता है। 2015 में खबर थी कि मुकुल पार्टी से अलग होना चाहते हैं और इसके लिए वह और उनके कुछ समर्थक चुनाव आयोग से नई पार्टी बनाने के लिए मिले भी हैं। कई नेताओं का कहना है कि वह सेंट्रल इंवेस्टिगेशन एजेंसी के दवाब में आ गए थे। कहा जाता है कई बार तो उन्होंने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए टीएमसी से जुड़ी जानकारी एजेंसी को दी थीं।

उसके बाद ही ममता ने मुकुल को महासचिव पद से हटा दिया था। पिछले दो महीनों से यह बात प्रमुखता से चल रही थी कि मुकुल TMC से संतुष्ट नहीं हैं और बीजेपी-संघ के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। उनके साथ तृणमूल सांसद कुनाल घोष समेत कुछ और लोगों के पार्टी छोड़ने की आशंका थी। वे सभी पार्टी से सस्पेंड चल रहे हैं।

फिलहाल मुकुल के समर्थकों का मानना है कि वह दुर्गा पूजा के बाद कोई बड़ी घोषणा कर सकते हैं। समर्थकों का दावा है कि ज्यादातर विधायक और सांसद मुकुल के साथ हैं। 

मुकुल अपनी Z प्लस सिक्योरिटी पहले ही छोड़ चुके थे। उन्होंने कहा था कि जब मैं किसी संसदीय पद पर हूं ही नहीं तो मुझे सुरक्षा की क्या जरूरत है।
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