वहीं, सरकार ने इस फैसले का समर्थन करते हुए मांग की है कि दोषी सांसदों को न केवल राज्यसभा चेयरमैन से बल्कि सदन और पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। दूसरी ओर निलंबित सासंदों ने यह कहते हुए इस मांग को खारिज कर दिया है कि हम लोगों के मुद्दे उठा रहे थे। नकवी ने इसे लेकर कहा कि सरकार हमेशा से उन सदस्यों के समर्थन में रही है जो मुद्दों पर सार्थक बहस करना चाहते हैं।
नकवी ने कहा, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ सदस्यों की प्राथमिकता सदन की गरिमा को भंग करना और कार्यवाही में बाधा पहुंचाना प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने लोकतंत्र के मंदिर की गरिमा को नुकसान पहुंचाया है उन्हें अपने कृत्यों को सही ठहराने की कोशिश करने के स्थान पर अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए। इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।
वरिष्ठ भाजपा नेता नकवी ने आगे कहा, 'विपक्ष को अब अपने सामंती अहंकार के हैंगओवर से बाहर आना चाहिए और संसदीय गरिमा को बनाए रखते हुए अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां का पालन करना चाहिए।' उन्होंने कहा कि अगर कोई अपनी गलती मान लेता है तो वह छोटा नहीं हो जाता है अपितु जब कोई व्यक्ति अपनी गलती ईमानदारी से स्वीकार करता है तो उसके कद में बढ़ोतरी ही होती है।