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खास बातचीत में बोले मुख्तार अब्बास नकवी, 'चौकीदार' को जितनी गाली दी जाएगी, हमें उतना ही फायदा होगा

Mon, 01 Apr 2019 07:40 PM IST
Prabudhh Jain चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुख्तार अब्बास नकवी से खास बातचीत - फोटो : Amar Ujala
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केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, पार्टी के सबसे प्रमुख मुसलमान नेता हैं। कई चुनावों से वे भारतीय जनता पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति की अहम कड़ी और प्रमुख रणनीतिकार हैं। कौन सा नेता प्रचार के लिए कहां जाएगा, कैसे जाएगा, कहां रहेगा, यह सब नकवी तय करते हैं। मौजूदा चुनाव में भाजपा की रणनीति, मुद्दों और प्रचार पर शरद गुप्ता से नकवी की बातचीत के मुख्य अंश: 

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* इस चुनाव में पार्टी के प्रचार की मुख्य थीम क्या होगी? 

विपक्षी गठबंधन की गठरी में इतनी गांठें हैं कि उनके खुलते-खुलते चुनाव ही निकल जाएगा। कांग्रेस को कोई छूने तक को तैयार नहीं है। छोटे दल अस्तित्व बचाने के लिए लड़ रहे हैं। मोदी का विकल्प नहीं है। इसलिए नहीं कि उन्होंने काम बहुत अच्छा किया है बल्कि उनके कुशल और मजबूत नेतृत्व के लिए। गांव के आदमी में उनकी स्वीकार्यता और विश्वसनीयता है।

* क्या तीन राज्यों के चुनाव में भाजपा की हार का असर पड़ेगा?

वहां हमारी सरकारें पंद्रह-पंद्रह साल से थीं। ऐसे में कुछ लोग तो नाराज होते ही हैं। लेकिन आप वोट प्रतिशत देखिए तो हम हारे नहीं हैं। न ही हमारी सीटें उनसे बहुत कम हैं। लेकिन किसानों की कर्ज माफी जैसे झूठे वादों की वजह से लोग कांग्रेस सरकारों से भी नाराज हो रहे हैं। 
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* भाजपा के प्रचार में पिछली बार थ्री-डी वीडियो रथ थे, गुजरात में सी-प्लेन था। इस बार नया क्या होगा? 

पांच साल में शायद ही कोई दिन रहा हो, जब प्रधानमंत्री और अध्यक्ष ने लोगों से संपर्क न किया हो। इसलिए हमें अलग प्रयोग की जरूरत नहीं है।

* सोशल मीडिया का बेहतर इस्तेमाल किया था, इस बार इसमें क्या अलग होगा?
सोशल मीडिया के जरिए प्रचार आज की हकीकत है। कोई इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता। अपनी वेबसाइट बनाने वाली देश की पहली पार्टी भाजपा ही थी। हमने पार्टी के प्रदेश मुख्यालयों को ऑडियो कांफ्रेंसिंग से जोड़ा था। बूथ स्तर तक हमने सोशल मीडिया समूह बनाए हैं जिससे कि कम समय में सभी समर्थकों तक बात पहुंच जाए। 

* क्या पिछले चुनाव घोषणापत्र में किए वादों का रिपोर्ट कार्ड पेश करेगी पार्टी? 

हमने अपने घोषणा पत्र को सौ फीसदी पूरा किया है। इसलिए हम जनता के बीच रिपोर्ट कार्ड लेकर ही जाएंगे। पिछला चुनाव हमने मोदीजी के नाम पर लड़ा, अब हम उनके काम पर लड़ेंगे। पिछले चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार था। दिल्ली में बिचौलियों के बड़े-बड़े ऑफिस थे। मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद सत्ता के गलियारों में दलालों की एंट्री बंद कर दी, सैकड़ों लोग यूं ही बेरोजगार हो गए। 

* पुलवामा हमले में इंटेलिजेंस एजेंसियों की विफलता थी, या  इनपुट को सुरक्षाबलों ने नजरअंदाज किया था?

यह पहला मौका है जब आतंकवादियों के खात्मे पर पाकिस्तान सबूत मांग रहा हो और कांग्रेस उसका समर्थन कर रही हो…

…सवाल बालाकोट का नहीं है, पुलवामा पर इंटेलिजेंस रिपोर्ट का है जो कांग्रेस बार-बार उठा रही है? 

पठानकोट, उड़ी, पुलवामा और बालाकोट को अलग कर नहीं देखा जा सकता है। हमारी सरकार बनने से पहले कोई ऐसा महीना नहीं होता था, जब देश में कहीं न कहीं आतंकवादी हमले न हो रहे हों। कभी अक्षरधाम तो कभी संकटमोचन मंदिर, कभी मक्का मस्जिद तो कभी मुंबई में, कभी दिल्ली के लाजपतनगर में तो कभी बनारस, हैदराबाद, बेंगलुरू में। सैकड़ों बेगुनाह मारे जाते थे।

हमारे पांच सालों में मोदीजी का डर समझिए या राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनकी कड़ी नीति का असर, एक भी आतंकवादी हमला नहीं हुआ, बेगुनाहों की हत्या नहीं हुई।

दो ही मामले हैं- पठानकोट हुआ तो उसके बाद पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की। फिर पुलवामा में सुरक्षा बलों पर हमला हुआ तो उसके बाद पाकिस्तान में घुसकर बालाकोट में आतंकी ठिकाने बर्बाद कर दिए। दोनों बार कांग्रेस ने सवाल खड़े किए। यानी चोट आतंकवादियों के लग रही थी, चीख कांग्रेसियों की निकल रही थी। जबकि भाजपा नेताओं ने इंदिरा गांधी के बांग्लादेश ऑपरेशन पर उन्हें दुर्गा और चंडी करार दिया था, सवाल नहीं खड़े किए थे।

* लेकिन भाजपा ने अलगाववादियों की सरमाएदार मानी जाने वाली पीडीपी के साथ लगभग चार साल तक सरकार क्यों चलाई? 

देखिए पीडीपी के बारे में हम कई बार जवाब दे चुके हैं। इस बार हमने आतंकवादियों के साथ-साथ अलगाववादियों पर भी सर्जिकल स्ट्राइक की है। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है, उनके खाते सीज हो गए हैं, आय के स्रोत खत्म हो गए हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो बालाकोट के बाद वे कश्मीर की सड़कों पर उतर कर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे होते। भारत में रहकर भारत के खिलाफ माहौल बना रहे होते। तो यह राष्ट्रविरोधी सोच पर भी हमला हुआ है। 

*क्या वजह है कि भाजपा चुनाव में मुसलमानों को बहुत कम प्रतिनिधित्व देती है। 

हम समावेश विकास की बात करते हैं। हमने उनकी शिक्षा, तरक्की, रोज़गार के साथ कभी भेदभाव नहीं किया है। हमारा विकास का मसौदा वोट का सौदा नहीं है। पिछली बार सात थे, इस बार भी हमने पांच-छह मुसलमानों को अभी तक टिकट दिया है। हम संकेतों (सिंबोलिज्म) में भरोसा नहीं करते। हम बिना तुष्टीकरण के सशक्तीकरण की बात करते हैं।

*क्या आपको भरोसा है कि इस बार भाजपा को मुसलमानों का वोट मिलेगा? 

हमें तो 2014 में भी 17 प्रतिशत मुसलमानों का वोट मिला था। अब हमारी सरकार में उन्हें शांति के साथ तरक्की के रास्ते पर चलने में मदद मिली है। शिक्षा में, रोजगार में, हर जगह मुसलमानों को प्रतिनिधित्व मिला है। मुद्रा लोन का 35 प्रतिशत अल्पसंख्यक समाज को मिला। उज्ज्वला योजना का 30 प्रतिशत हिस्सा अल्पसंख्यक समाज को मिला है। इसलिए हम केवल गरीब और जरूरतमंद देखते हैं, बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक नहीं। 
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* प्रियंका गांधी के आने से यूपी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?  

प्रियंका गंधी फिलहाल पॉलिटिकल पर्यटन में लगी हैं। हमें खुशी है कि उनकी राजनीतिक सैर गंगाजल से शुरू हुई। और इसे संपन्न कराने में हमारी सरकार का बड़ा योगदान है। इससे पहले कोई मोटरबोट में प्रयाग से काशी जाने का सोच भी नहीं सकता था। यह हमारे अविरल गंगा, निर्मल गंगा की सफलता का प्रमाण है।

राजनीति में उनकी एंट्री हमारे लिए परेशानी का सबब नहीं है। पांच साल में कांग्रेस ने जैसी राजनीति की है, उसके बाद वे गंगाजल में डुबकी लगा लें, या काशी चले जाएं, बालाकोट पर उनके सवाल के गुनाह धुलने वाले हैं। 

* राहुल गांधी की न्यूनतम आय योजना का भाजपा के चुनाव प्रचार पर क्या असर पड़ेगा? 

कांग्रेस का 1971 में नारा था- गरीबी हटाओ। अब नई पैकेजिंग कर हो गया गरीबी मिटाओ। इन पचास सालों में से 40 में उसकी सरकारें रही हैं। लेकिन गरीबी जहां की तहां है। 

* क्या 6000 रुपये साल बनाम 6000 रुपये महीना मुद्दा नहीं बनेगा?

देखिए यह उनकी चुनावी चौपाल की चकल्लस है। इससे ज्यादा कुछ नहीं। 

* तीन तलाक अध्यादेश से भाजपा को कितना लाभ होगा?

यह सामाजिक कुरीतियां दूर करना भाजपा का संकल्प है। इसे हम चुनावी लाभ की दृष्टि से नहीं देखते हैं।

* कांग्रेस पूछ रही है कि नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और विजय माल्या भाग गए, तब चौकीदार क्या कर रहा था?

चौकीदार को जितना गाली देंगे, हमें उतना लाभ होगा। मोदीजी को गाली देने वाला एक गैंग तैयार हुआ है, गली के मवालियों का गाली गैंग, पहले वह चाय वाले को गाली देता था, अब चौकीदार को। जनता ने पिछले चुनाव में उनका हिसाब किया था, इस चुनाव में भी करेगी! 

* पिछले चुनाव में भी भाजपा ने ‘दामादजी’ को मुद्दा बनाया था, पांच साल में इस पर सरकार ने क्या किया ? 

अभी राहुल गांधी, प्रियंका कह रहे हैं कि हमारे साथ बड़ा ज़ुल्म हो रहा है। यहां कोई तानाशाही तो है नहीं कि हम एक दिन पकड़ें और सजा दे दें। लेकिन जिसने भी जनधन की लूट की है, वह बचेगा नहीं। न कोई भेदभाव है न कोई पूर्वाग्रह।
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