सार
कर्नाटक की विशेष अदालत ने मुडा जमीन घोटाला मामले में पुलिस के दायर की गई बी रिपोर्ट को सही माना है। पुलिस को मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के कोई सबूत नहीं मिले, जिससे उन पर लगे सभी आरोप फिलहाल खत्म हो गए हैं।
सिद्धारमैया, कर्नाटक के मुख्यमंत्री
- फोटो : ANI
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को मुडा (MUDA) जमीन घोटाले में बड़ी राहत मिली है। बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने इस मामले में लोकायुक्त की पेश की गई 'बी' रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इस फैसले से मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी बीएम पार्वती को कानूनी मुश्किलों से बड़ी राहत मिली है।जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने 28 जनवरी को यह रिपोर्ट मंजूर की। लोकायुक्त ने पुलिस की जांच रिपोर्ट को सही ठहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला साल 2021 का है। आरोप था कि मैसूरु के विजयनगर जैसे महंगे इलाके में मुख्यमंत्री की पत्नी को 14 प्लॉट गलत तरीके से दिए गए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस बात की जांच कर रहा था कि मुडा ने केसरे गांव में पार्वती की 3.16 एकड़ जमीन ली थी। आरोप लगा कि सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर उन 14 प्लॉटों को मुआवजे के तौर पर लिया। मुडा ने शुरुआत में यह जमीन सिर्फ 3,24,700 रुपये में ली थी, जबकि बदले में दिए गए प्लॉटों की कीमत करीब 56 करोड़ रुपये बताई गई।
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2024 में मिली जांच की अनुमति
इस मामले में कानूनी प्रक्रिया काफी लंबी चली। 19 अगस्त 2024 को कर्नाटक के राज्यपाल ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच की अनुमति दी थी। इसके बाद 24 सितंबर 2024 को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी इस अनुमति को सही माना था। अदालत का कहना था कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच जरूरी है।
सिद्धारमैया और उनके परिवार को मिली राहत
हालांकि, साल 2025 की शुरुआत में ही इस मामले में राहत के संकेत मिलने लगे थे। कर्नाटक के मंत्री एचके पाटिल ने बताया था कि इस घोटाले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने मुख्यमंत्री को क्लीन चिट दे दी है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पीएन देसाई ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मुख्यमंत्री या उनके परिवार ने इस मामले में कोई गलती नहीं की है। अब अदालत के ताजा फैसले ने मुख्यमंत्री को इस बड़े विवाद से पूरी तरह बाहर निकाल दिया है।
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