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एमपीएससी परीक्षा विवाद: पुणे में पेपर लीक और गड़बड़ी के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र, सरकार से की ये पांच मांग?

सार

महाराष्ट्र में एमपीएससी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ पुणे में अभ्यर्थियों ने विरोध मार्च निकाला। छात्रों  ने आयोग को आठ दिन में जवाब देने का अल्टीमेटम भी दिया। आईए जानते हैं क्या मांंग है
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छात्रों का प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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एमपीएससी के बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने सोमवार को पुणे में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और विभिन्न परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध मार्च निकाला। यह मार्च ओंकारेश्वर मंदिर चौक से शुरू हुआ और पुणे जिला कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़ा, जहां प्रदर्शनकारियों ने एमपीएससी के कामकाज और परीक्षा प्रक्रियाओं से संबंधित मांगें रखीं।

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छात्रों ने क्या मांग की? 
  • प्रदर्शनकारियों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे और पदों पर साफ छवि वाले अधिकारियों की तत्काल नियुक्ति की मांग की। 
  • मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा एमपीएससी को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। मुंबई क्राइम ब्रांच मार्च में आयोजित एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) स्क्रीनिंग परीक्षा से संबंधित प्रश्न पत्र लीक की जांच कर रही है।
  • उन्होंने तीनों आरोपियों के संपर्कों के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच और एजेंटों की कथित संलिप्तता की जांच की भी मांग की।
  • उम्मीदवारों ने अन्य परीक्षाओं के परिणामों को लेकर छात्रों द्वारा उठाए गए संदेहों की स्वतंत्र जांच और संदिग्ध परिणामों तथा सफल उम्मीदवारों की फोरेंसिक ऑडिट की भी मांग की।
  • उन्होंने मांग की कि 25 अक्टूबर, 2026 को होने वाली ग्रुप-सी (क्लर्क और टाइपिस्ट के लिए) की प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाए। प्रदर्शनकारियों ने स्टेनोग्राफर के पद को पुनः शुरू करने की भी मांग की।
 कितने दिन का समय दिया है? 
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आयोग ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) परीक्षा के बारे में उठाई गई आपत्तियों पर आठ दिनों के भीतर स्पष्टीकरण दे और कथित अनियमितताओं की जांच शुरू करे। अन्य मांगों के अलावा, उम्मीदवारों ने 2025 की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा और कृषि सेवा परीक्षा के  प्रश्नों के मूल्यांकन में कथित कमी की जांच की मांग की।
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रोहित पवार ने क्या कहा? 
एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम प्रदर्शनकारियों में शामिल हुए और उनकी मांगों का समर्थन किया। पवार ने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों की मांगों को पूरा करना होगा।

'यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं'
पवार ने कहा कि राज्य सरकार को छात्रों की मांगें पूरी करनी होंगी। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं है। यह एमपीएससी परीक्षा के सभी उम्मीदवारों का नेतृत्व वाला आंदोलन है।'

अबतक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं? 
अपने इस्तीफे की मांगों के बीच, एमपीएससी के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने पिछले सप्ताह कहा था कि ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होने की घटना उनके द्वारा भर्ती निकाय का कार्यभार संभालने से पहले हुई थी। मुंबई पुलिस ने इस मामले में परीक्षा में सातवीं रैंक हासिल करने वाली एक महिला उम्मीदवार सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है।

भीमनवार के अनुसार, आयोग ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए निवारक और सुरक्षा उपायों की सिफारिश करने हेतु एक उच्च स्तरीय आंतरिक समिति का भी गठन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने समग्र परीक्षा प्रक्रिया में आवश्यक सुधारों के सुझाव देने के लिए अलग से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।


गौरतलब है कि महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों ने खराब छात्रावास स्थितियों, छात्र सुरक्षा और परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में प्रदर्शन किए हैं, जिसके चलते राज्य सरकार को प्रमुख मांगों को स्वीकार करना पड़ा और एक नया परीक्षा सुधार पैनल गठित करना पड़ा।
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