दलितों पर अत्याचार मामले में आसमान सिर पर उठा कर दलित प्रेम का इजहार करने वाले सांसद इस मामले में लोकसभा में हुई चर्चा से दूर नजर आए। चर्चा के साढ़े चार घंटे बीत जाने के बावजूद इस दौरान दिग्गज नेताओं समेत एक तिहाई सांसद सदन में ही नहीं थे। इस दौरान अनुपस्थित रहने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, संसदीय दल के नेता मल्लिकर्जुन खड़गे, सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव, टीएमसी संसदीय दल के नेता सुदीप बंदोपाध्याय नजर नहीं आए। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष स्वास्थ्य कारणों से बीते कुछ दिनों से सदन में नहीं आ रही हैं।
चर्चा शुरू होने के तीन घंटे तक मोदी सरकार के 10 मंत्री और महज 40 सांसद ही सदन में नजर आए। चर्चा के क्रम में विपक्ष ने जहां दलितों पर अत्याचार के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया, वहीं भाजपा और सहयोगी दलों ने विपक्ष के कार्यकाल के दौरान दलितों पर हुए अत्याचार का मामला उठा कर जवाबी हमला बोला। सरकार की ओर से चर्चा में शामिल नेताओं ने दलितों पर अत्याचार के लिए खराब शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक सोच और सामाजिक आंदोलन न होने को भी एक बड़ा कारण माना।
भाजपा के उदित राज और लोजपा प्रमुख रामविलास ने इसी बहाने बसपा प्रमुख मायावती पर निशाना साधा। माकपा के बीके बिजु ने जब चर्चा की करीब ढाई बजे शुरुआत की, तब सदन में सदस्यों की संख्या सौ भी नहीं थी। सत्ता पक्ष के बेंच पर मंत्री सहित महज 36 सदस्य ही उपस्थित थे। जबकि विपक्षी की सत्ता पक्ष की सामने वाली बेंच पूरी तरह खाली थी।
इसके बाद चर्चा शुरू होते ही आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया। बिजु ने गौरक्षकों और दलित के संबंध में दिए गए प्रधानमंत्री के बयान की चर्चा करते हुए कहा कि समय बयान देने का नहीं बल्कि कार्रवाई करने का है। कांग्रेस के केएच मुनियप्पा ने उना में दलितों की पिटाई का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र में नई सरकार के आते ही दलितों के खिलाफ हमलों में तेजी से इजाफा हुआ है।
विपक्ष के कई सदस्यों ने पूरे मामले में न्यायपालिका की भूमिका की भी तीखी आलोचना की।इसके जवाब में भाजपा सांसद उदित राज ने कांग्रेस कार्यकाल और विपक्षशासित राज्यों में दलितों के खिलाफ अत्याचार का मामला उठा कर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि समस्या लोगों की सामाजिक सोच, खराब शिक्षा और सामाजिक आंदोलन न होना है। इसी दौरान उन्होंने संयुक्त मोर्चा सरकार में पदोन्नति सहित कई क्षेत्रों में आरक्षण खत्म किए जाने की बात की और कहा कि तब वाजपेयी सरकार ही थे जिन्होंने प्रावधान में बदलाव कर दलितों की रक्षा की।