फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shashi Tharoor: सदन के बार-बार स्थगन से सांसद शशि थरूर निराश, कहा- संसद ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की

Fri, 20 Dec 2024 02:51 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संसद का शीतकालीन सत्र इस बार हंगामे की भेंट चढ़ा। गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। शशि थरूर ने कहा कि संसद ने अपनी जिम्मेदारी को पूरा नहीं किया। संसद ने देश के लोगों को निराश किया। मैं और हमारे कई सांसद इससे निराश हैं।
विज्ञापन
शशि थरूर - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

संसद की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने और बार-बार हुए हंगामे को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने निराशा जताई। उन्होंने कहा कि संसद ने अपनी जिम्मेदारी को पूरा नहीं किया। संसद ने देश के लोगों को निराश किया। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर ने कहा कि मैं बहुत निराश हूं। हमारे कई सांसद भी निराश हैं। मुझे लगता है कि हमारे देश में कई ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर चर्चा होनी चाहिए। 

विज्ञापन




उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि इस समय का अधिकांश हिस्सा व्यवधान में बर्बाद हो गया है।  मुझे लगता है कि हमने भारत के लोगों को निराश किया है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। संसद बहस और चर्चा के लिए एक मंच है लेकिन व्यवधान के लिए नहीं है।

थरूर ने कहा कि पहले सप्ताह में सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनी थी कि विपक्ष बाहर विरोध कर सकता है, लेकिन संसद के अंदर काम जारी रहेगा। यह दो-तीन दिन तक चला भी, लेकिन इसके बाद हम एक बार फिर पूरी तरह से टूट गए। यह बेहद गलत हुआ है। मुझे लगता है कि सरकार इसे लेकर विपक्ष से बात करेगी और समाधान निकालेगी। ताकि हम निष्पक्ष रूप से सदन के काम को आगे बढ़ा सकें। फरवरी-मार्च में होने वाले बजट सत्र इसे दोहराया नहीं जाना चाहिए। 
विज्ञापन


दरअसल संसद का शीतकालीन सत्र इस बार हंगामे की भेंट चढ़ा। गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन की कार्यवाही में बार-बार हुए व्यवधान को लेकर राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सांसद के तौर पर देश के लोग हमारी कड़ी आलोचना कर रहे हैं। यह सही भी है क्योंकि लगातार हो रहे व्यवधान लोकतांत्रिक संस्थानों में जनता के विश्वास को लगातार कम कर रहे हैं।

विज्ञापन


संबंधित वीडियो

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें