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जाली पासपोर्ट रैकेटः भारत-बांग्लादेश सीमा पर धड़ल्ले से हो रहा फर्जीवाड़ा; आतंकी भी रच सकते हैं साजिश

सार

बंगाल में इन बाग्लादेशियों को फर्जी दस्तावेज बनाने और फिर कुछ पैसों की मदद से पासपोर्ट बनाना सबसे आसान होता है। फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच कर रहे अधिकारी दबी जुबान से यह बात स्वीकार करते हैं कि इसमें निचले स्तर के पुलिसकर्मियों की मिलीभागत हो सकती है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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पड़ोसी मुल्क बांग्लादेशी नागरिक भारतीय पासपोर्ट बनाकर आसानी से यूरोप और विदेशों में नौकरी कर रहे हैं। इतना ही नहीं जाली दस्तावेज से कोई भी आतंकवादी बहुत आसानी से भारतीय पासपोर्ट हासिल कर सकता है। इस खुसाले के बाद से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। फर्जी पासपोर्ट रैकेट मामले की जांच कर रही पुलिस को कुछ इस तरह के सबूत मिले हैं।

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बंगाल में इन बाग्लादेशियों को फर्जी दस्तावेज बनाने और फिर कुछ पैसों की मदद से पासपोर्ट बनाना सबसे आसान होता है। फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच कर रहे अधिकारी दबी जुबान से यह बात स्वीकार करते हैं कि इसमें निचले स्तर के पुलिसकर्मियों की मिलीभागत हो सकती है। उल्लेखनीय है कि अभी तक कोलकाता और उसके आसपास और मालदा जिले से चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। भारत का पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए राज्यभर में जो जाली रैकेट फैलाया गया है, उसकी जानकारी धीरे-धीरे सामने आ रही है।

दस्तावेजों के आधार पर बनता है पासपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेशियों को यूरोप और विदेश में नौकरी के लिए काफी कठिनाई होती है। अगर उनको भारतीय पासपोर्ट मिल जाए तो वे बड़ी आसानी से वहां नौकरी मिल जाती है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस पूछताछ में यह पता चला है पड़ोसी मुल्क के लोग यहां पर फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह से संपर्क करते हैं और कुछ पैसों में फर्जी दस्तावेज से लेकर पासपोर्ट तक बन जाता है। खास कर भारत-बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों में रैकेटियों का यह बहुत बड़ा नेक्सेस है।
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एक अधिकारी ने बताया कि लोग तो लोग, यहां तो आतंकवादी भी आसानी से फर्जी पासपोर्ट बना सकते हैं। क्योंकि जो दस्तावेज वे जमा करते हैं, उसी आधार पर उनको पासपोर्ट मिलता है। अगर आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड सही हैं, तो वे पासपोर्ट देने के लिए बाध्य होते हैं। हमें नहीं पता है कि वह आतंकवादी है या साधारण इनसान। उन व्यक्तियों के बारे में यह जानने का कोई तरीका या ढांचा नहीं है कि वे कहां के निवासी हैं, उन्हें आधार कार्ड कैसे मिला, और वे कितने समय से भारत में हैं। आरोप है कि कोलकाता में ही 3 हजार से अधिक फर्जी पासपोर्ट बने हैं।

मालदाः क्यों बन रहे हैं इतने पासपोर्ट?
सूत्रों के मुताबिक, राज्य की खुफिया एजेंसी की नजर मालदा में बने रहे अत्यधिक पासपोर्स से पर पड़ी है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि मालदा में इतने सारे पासपोर्ट कैसे बन रहे हैं। जानकारी मिली है कि मालदा में पिछले करीब एक साल में 10 हजार से अधिक पासपोर्ट बने हैं। एजेंसी के अधिकारियों को भनक लगी है कि मालदा के वैष्णवनगर, कालियाचक, हबीबपुर में भारत-बांग्लादेश सीमा पार कर के कई लोग यहां आकर पासपोर्ट बना रहे हैं। यहां धड़ल्ले से फर्जी दस्तावेज बन रहे हैं और बांग्लादेशी आसानी से पासपोर्ट बना रहे हैं। अब राज्य खुफिया विभाग आवेदकों से 1971 के पहले के दस्तावेज दिखाने की मांग कर रहा है।

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