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MP Polls: मध्य प्रदेश में मामा शिवराज 'इन' होंगे या 'आउट'? पारंपरिक बुधनी सीट से पेश कर रहे हैं उम्मीदवारी

सार

MP Polls: भाजपा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उनकी अपनी बुधनी सीट से ही उतारा है, लेकिन मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। विकल्प खुला रखा है और सामूहिक नेतृत्व के सहारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पर चुनाव लड़ रही है।
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए भाजपा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उनकी अपनी बुधनी सीट से ही उतारा है, लेकिन मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। विकल्प खुला रखा है और सामूहिक नेतृत्व के सहारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पर चुनाव लड़ रही है। सवाल बड़ा है। क्या राज्य की जनता के मामा और मुख्यमंत्री शिवराज चुनाव बाद 'इन' होंगे या 'आउट'? भाजपा में ही शिवराज विरोधी एक शब्द का उत्तर देते हैं, आउट। शिवराज के समर्थक और एक प्रत्याशी का कहना है कि उनका तो जनता से रिश्ता है। मामा आउट कैसे हो सकते हैं?

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वरिष्ठ पत्रकार और विंध्य क्षेत्र में घूम रहे नरेंद्र कुमार मौर्य को भी मामा चुनाव बाद आउट दिखाई दे रहे हैं। राकेश पाठक कहते हैं जनता काफी नाराज है। बुरी तरह आउट हो सकते हैं। लेकिन एक सवाल का जवाब ठहर कर आता है। क्या भाजपा आउट होगी या शिवराज? वरिष्ठ पत्रकार और जबलपुर के रहने वाले स्वपनिल तिवारी इससे सहमत हैं कि म.प्र. विधान सभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भाजपा आउट हो सकती है, लेकिन शिवराज बने रहेंगे। उनकी राजनीति अभी चलेगी। इसके पीछे तर्क है कि भाजपा के पास म.प्र. की राजनीति में न तो शिवराज सिंह चौहान का कोई विकल्प है और न ही उनसे अधिक भावी मुख्यमंत्री के रूप की जनता द्वारा पसंद किया जाने वाला चेहरा। 

ऐसे सवालों पर भाजपा के दिल्ली में बैठे राष्ट्रीय प्रवक्ता कोई जवाब नहीं देते। वह बस इतना कहते हैं कि चुनाव बाद भाजपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी। भाजपा के दूसरे प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल कहते हैं कि चुने हुए प्रतिनिधियों का हक क्यों छीन रहे हैं। चुनाव हो जाने दीजिए। मतदान के बाद विधायक अपना नेता चुनेंगे। भाजपा लोकतांत्रिक पार्टी है।

तो क्या शिवराज के चेहरे पर सरकार बन जाएगी?

एक राष्ट्रीय चैनल के साथ सर्वेक्षण में लगी एजेंसी के सीनियर इक्जीक्यूटिव का कहना है कि शिवराज के चेहरे पर म.प्र. में भाजपा की सरकार बनने की संभावना नहीं है। सूत्र का कहना है कि उन्हें चेहरे के तौर पर कांग्रेस के कमलनाथ से शिवराज का चेहरा बहुत कमजोर नहीं नजर आता। लेकिन शिवराज को छोड़ दें तो जमीन पर भाजपा के पास दूसरा चेहरा घोषित न करने की तमाम मजबूरियां दिखाई दे रही हैं। इसके बाद लोकप्रियता के मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया बचते हैं, लेकिन परिवारवाद का मुद्दा और एक क्षेत्र विशेष में ही उनकी पकड़ है। इसलिए शिवराज को मुख्यमंत्री के तौर पर  घोषित न करने का फैसला भाजपा ने सोच समझकर लिया होगा।

मुख्यमंत्री का चेहरा कितना अहम?

2020 में ज्योतिरादित्य की समर्थकों संग कांग्रेस से बगावत के बाद भाजपा में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर काफी चर्चा हुई थी। तब शिवराज संभावित सभी चेहरों पर भारी पड़े थे। कांग्रेस के प्रवक्ताओं का कहना है कि म.प्र.-छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री का चेहरा इस बार काफी अहम है। दरअसल, इन दोनों राज्यों में कांग्रेस चुनावी लड़ाई में अच्छी स्थिति में है। 

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कहा जा सकता है कि तुलना में भाजपा से बेहतर स्थिति में है। लेकिन कांग्रेस राजस्थान में भावी मुख्यमंत्री के चेहरे पर कुछ कहने से बच रही है। इसके पीछे की बड़ी वजह सचिन पायलट, उनका खेमा और वोटों का डर है। कांग्रेस का यही पक्ष मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए अनुकूल लग रहा है। भाजपा के प्रवक्ता इसी मुद्दे पर अपनी पार्टी के फायदे के लिए कांग्रेस को घेरने लगते हैं। इसका भी कारण साफ है। राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई में कोई बड़ा अंतर नहीं चल रहा है। यदि कांग्रेस वहां मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दे तो भाजपा के पक्ष में संभावना का अंतर बड़ा हो जाएगा। शिवराज की टीम को भी म.प्र. में इसी तरह का सस्पेंस बना रहने में काफी कुछ संभावना दिखाई दे रही हैं। खंडवा के एक नेता कहते हैं कि मतदान हो जाने दीजिए। मुख्यमंत्री का फैसला तो इसके बाद होगा। तब देखा जाएगा। अभी तो राज्य में हमारे नेता शिवराज सिंह चौहान ही हैं।

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