कई बार कहा जाता है कि सियासत में ऐसे संयोग बनते है जो वर्षों तक चर्चा का केंद्र में रहते है। आज मध्यप्रदेश की राजनीति में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा हैं। एमपी के नए डॉ. मोहन यादव अपने मंत्रिमंडल का गठन करने जा रहे है। इससे जुड़ा एक अजब संयोग बना है। जो 2018 में बनी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार से जुड़ा हुआ है।
2018 में जब कांग्रेस को राज्य में बहुमत मिला था। इसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपना पहला मंत्रिमंडल का गठन 25 दिसंबर को ही किया था। जबकि इसी तरह 2023 में भी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव अपना पहला मंत्रिमंडल का विस्तार 25 दिसंबर को करने जा रहे है। इसके अलावा सबसे खास बात यह है कि कांग्रेस सरकार के दौरान भी 28 मंत्रियों ने ही शपथ ली थी। जबकि सीएम मोहन यादव के मंत्रिमंडल में भी 28 मंत्रियों के ही शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो दोनों सरकारों के बीच यह गजब का संयोग बन सकता है।
इसके अलावा एक खास बात यह भी है कि मोहन यादव की कैबिनेट में कुछ मंत्री ऐसे भी होंगे जिन्होंने 2018 में कमलनाथ सरकार में भी मंत्रिपद की शपथ ली थी। लेकिन बाद में वह बाद में सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हो गए। विधायक तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी, गोविंद सिंह राजपूत और प्रद्युम्न सिंह तोमर ऐसे विधायक हैं 2018 में भी शपथ ली थी। जबकि इस बार भी इनके नाम मंत्री बनने की दौड़ में है। अगर यह विधायक मंत्री पद की शपथ लेते हैं तो यह भी एक अजब संयोग बनेगा।
हालांकि, कमलनाथ सरकार के समय हुए मंत्रिमंडल विस्तार की खासियत यह थी कि सभी 28 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली थी। जबकि सीएम मोहन यादव के मंत्रिमंडल में कैबिनेट के साथ-साथ राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्यमंत्री भी शामिल होंगे।