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राज्यसभा ने ये बिल पास कर दिया तो सड़कों पर 40 फीसदी तक घट जाएंगे जानलेवा हादसे 

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Fri, 26 Jul 2019 12:00 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

मोटर व्हीकल (संशोधन) बिल-2019 लोकसभा से पास होने के बाद अब राज्यसभा में चला गया है। माना जा रहा है कि यह बिल राज्यसभा में भी आसानी से पास हो जाएगा।इस बिल को लेकर तकरीबन सभी पार्टियों की सहमति है।



सड़क सुरक्षा और ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर काम कर रहे सेव लाइफ फाउंडेशन के सीईओ पीयूष तिवारी का दावा है कि ये बिल राज्यसभा में पास हो जाता है और सभी राज्य बिल में शामिल तमाम प्रावधानों को दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ लागू करते हैं तो अगले पांच साल में यानी 2024 तक सड़कों पर होने वाले 40 फीसदी जानलेवा हादसे घट जाएंगे।


इस बिल में ट्रैफ़िक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।इसके अलावा वाहन की गलत बनावट है, उसमें सुरक्षा के मापदंड पूरे नहीं होते हैं तो डीलर के खिलाफ कार्रवाई होगी।रोड इंजीनियरिंग की वजह से अगर कोई हादसा होता है तो सीधे तौर पर संबंधित ठेकेदार या कंपनी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।


बता दें कि देश में हर साल करीब डेढ़ लाख सड़क हादसों में मारे जाते हैं।इसमें कहीं पर चालक की गलती होती है तो कहीं सड़क खराब होने की वजह से जानलेवा हादसा हो जाता है।हालांकि केंद्रीय भूतल परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि 70 फीसदी सड़क हादसे चालक की लापरवाही से होते हैं।


पीयूष तिवारी का कहना है कि इस बिल में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनका सीधा प्रभाव चालकों पर देखने को मिलेगा।मौजूदा एमवी एक्ट 1988 से चला आ रहा है।यानी उस वक्त हेलमेट न पहनने या लालबत्ती उल्लंघन का जुर्माना सौ रुपया तय किया गया था, वही आज तक चल रहा है।


यही वजह है कि वाहन चालक ट्रैफ़िक नियमों की परवाह नहीं करते।पेनल्टी की लिस्ट देखें तो अधिकांश कॉलम में सौ से पांच सौ रुपये ही नजर आते हैं।हमने केंद्रीय भूतल परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से आग्रह किया है कि वे सड़क हादसों की वैज्ञानिक तरीके से जांच सुनिश्चित कराएं।


इसके अलावा ऐसे हादसों की जांच के लिए एक अलग से अथॉरिटी के गठन का भी प्रस्ताव दिया गया है।नए एक्ट में सौ रुपये का कोई चालान नहीं है, कम से कम पांच सौ से लेकर एक हजार रुपये तक की राशि का चालान प्रस्तावित है। 
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पैदल यात्रियों के लिए:  

मौजूदा मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कुछ नहीं कहा गया है।नए एक्ट में राज्य सरकार को यह पावर दी गई है कि वह पैदल यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर राज्य सतर पर नियम बना सकती है।


बच्चों के लिए: 

पुराना एक्ट बच्चों की सुरक्षा पर भी मौन है, लेकिन नए एक्ट के सेक्शन 194-बी के तहत चार साल से बड़े बच्चें के लिए कार में सीट बेल्ट अनिवार्य कर दी गई है।अगर ऐसा नहीं होता है तो वाहन मालिक पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना होगा।वह बच्चा दुपहिया वाहन पर बैठा है तो उसे हेलमेट पहनाना होगा।


रिकॉल ऑफ व्हीकल:

मौजूदा एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि तय समय से पहले केंद्र सरकार पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन करने वाली गाडियों को वापस बुला सकती है।अर्थात उन्हें सम्बंधित कम्पनी में वापस भिजवा सकती है।अब नए एक्ट के सेक्शन 110 ए और 110 बी में प्रावधान कर केद्र सरकार को रिकॉल ऑफ व्हीकल की पावर दे दी गई है।


गलत रोड इंजीनियरिंग की जवाबदेयी: 

फिलहाल रोड इंजीनियरिंग की वजह से अगर कोई हादसा होता है तो सीधे तौर पर इसके लिए संबंधित ठेकेदार या कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता।नए एक्ट में ऐसे केस के तहत सम्बंधित एजेंसी या ठेकेदार पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है।


बच्चों के हाथ में वाहन देना: 

मौजूदा एक्ट में एक हजार रुपये का जुर्माना और तीन माह तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन नए एक्ट के सेक्शन-199 ए के तहत कसूरवार पर 25 हजार रुपये जुर्माना और तीन साल तक की सजा का नियम बना दिया गया है।इसके अलावा नाबालिग के खिलाफ भी जुवेनाइन जस्टिस एक्ट के तहत एक्शन लिया जाएगा।


हिट एंड रन: 

ऐसे केस में यदि पीड़ित घायल है तो आरोपी वाहन चालक पर 12500 और पीड़ित की मौत होने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना होता है।नए एक्ट में क्रमशः यह राशि पचास हजार और दो लाख रुपये रखी गई है।साल 2018 में हिट एंड रन के करीब 55 हजार मामले सामने आए थे, जिनमें 22 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई है।


रेसिंग करने पर: 

अभी पांच सौ रुपये और नए एक्ट में पांच हजार। 


सीट बेल्ट: 

अभी सौ रुपये, नए एक्ट में एक हजार। 


हेलमेट: 

अभी सौ रुपये और नए एक्ट में एक हजार। 


बिना इंस्योरेंश: 

मौजूदा एक्ट में एक हजार रुपये नए एक्ट में दो हजार।


बिना डीएल:

अभी पांच सौ रुपये और नए एक्ट में पांच हजार। 

अयोग्य ठहराने के बाद भी ड्राइविंग करते पकड़े गए तो दस हजार रुपये का चालान होगा, जबकि अभी यह राशि पांच सौ रुपये है। 


वाहन की गलत बनावट: 

अभी ऐसा कोई प्रावधान है ही नहीं कि वाहन की गलत बनावट के चलते हादसा हो जाए और संबंधित कंपनी पर जुर्माना हो।नए एक्ट में यह प्रावधान शामिल है।यदि सुरक्षा के मापदंड पूरे नहीं होते हैं तो डीलर पर एक लाख और निर्मामा पर सौ करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।


ओवर स्पीड: 

अभी चार सौ रुपये और नए एक्ट में दो से चार हजार रुपये प्रस्तावित किया गया है। 


खतरनाक ड्राइविंग: 

अभी एक हजार और नए एक्ट में पांच हजार रुपये। 


ड्रंकन ड्राइविंग: 

अभी दो हजार और नए एक्ट में दस हजार रूपये तक का जुर्माना किया जा सकता है।जेल की सज़ा का भी प्रावधान। 

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