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MACT: 2018 सड़का दुर्घटना में विकलांग हुई 2 महिलाओं को मुआवजा, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने दिया आदेश

Mon, 23 Feb 2026 11:43 AM IST
संध्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

ठाणे मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 2018 हादसे में पीड़िता को 20.9 लाख और घरेलू सहायक को 7.7 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया, विकलांगता 50% मानते हुए बीमा कंपनी को भुगतान निर्देशित किया।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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ठाणे में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 2018 में हुए एक सड़क दुर्घटना में मुआवज का एलान किया है। पीड़िता को  20.9 लाख रुपये और उसका घरेलू सहायक को 7.7 लाख रुपया मुआवजे के रूप में देने के एलान किया है। दरअसल इस हादसे में दर्जी महिला के दोनो निचले अंग पक्षाघात (पैरालिसिस) हो गए थे। इसके कारण वह 80 प्रतिशत 

दर्जी के दोनों निचले अंगों में पैरालिसिस के बाद वह 80 प्रतिशत स्थायी विकलांगता का सामना कर रही थी, लेकिन ट्रिब्यूनल ने उसकी विकलांगता  को 50 प्रतिशत बताया। ट्रिब्यूनल ने तर्क देते हुए कहा आजकल की इलेक्ट्रिक सिलाई मशीनों को हाथों और कोहनियों का इस्तेमाल करके चलाया जा सकता है।

ट्रिब्यूनल के सदस्य आरवी मोहिते ने 12 फरवरी को पास किए गए दो अलग-अलग ऑर्डर में, दोषी ट्रेलर ट्रक के इंश्योरर को पहली बार में मुआवजे की रकम देने और बाद में इंश्योरेंस की शर्तों के जानबूझकर उल्लंघन के कारण गाड़ी के मालिक से वसूलने का निर्देश दिया।

कब हुई थी घटना?

यह घटना 24 अप्रैल, 2018 को हुई, जब 35 वर्षीय सायली विजय सालुंखे अपनी घरेलू सहायिका रत्ना विजय भागवत के साथ लग्ज़री बस में सफ़र कर रही थीं।

गुजरात के वलसाड ज़िले में एक पुल के पास पहुंचने के बाद, बस नेशनल हाईवे की पहली पटरी पर बिना किसी सिग्नल, लाइट या इंडिकेशन के खड़े एक ट्रेलर के पिछले हिस्से से टकरा गई। टक्कर में दो बस ड्राइवरों की मौत हो गई, और कई यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।

ट्रिब्यूनल में क्या तर्क दिया गया

ट्रेलर हाईवे पर लापरवाही से पार्क किया गया था, जिससे वह बस ड्राइवर को दिखाई नहीं दे रहा था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि दुर्घटना की तारीख पर ट्रेलर के पास वैलिड फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं था, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।

सालुंखे को 80 प्रतिशत विकलांग हो गई क्योंकि उनके दोनों निचले अंग काम करना बंद कर चुके थे।। ट्रिब्यूनल ने उनकी विकलांगता को  50 प्रतिशत ही आंका।  इसी के साथ तर्क दिया कि आधुनिक इलेक्ट्रिक सिलाई मशीनें हाथों और कोहनियों से चलाई जा सकती हैं।

उन्हें मुआवज़े के तौर पर 20,92,510 रुपये दिए गए, जिसमें आगे के मेडिकल खर्च के लिए 1.5 लाख रुपये शामिल हैं।

भागवत कमर के हिस्से में चोट लगने की वजह से 51 प्रतिशत विकलांगता का सामना कर रही थीं। उनकी विकलागंता को 30 प्रतिशत मानते हुए, ट्रिब्यूनल ने उन्हें 7,75,653 रुपये का मुआवज़ा दिया।

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