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'जजों को हटाने के लिए संसद में लाए जाने वाले प्रस्ताव को महाभियोग कहना असंवैधानिक'

Fri, 20 Apr 2018 06:58 PM IST
सुभाष कश्यप, सेवानिवृत्त महासचिव, लोकसभा
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dipak mishra
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सबसे पहले मैं यह कहना चाहूंगा कि जजों को हटाने के लिए संसद में लाए जाने वाले प्रस्ताव को महाभियोग कहना असंवैधानिक है। संविधान में सिर्फ राष्ट्रपति को हटाने के लिए ही महाभियोग प्रस्ताव लाने की व्यवस्था है। हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के जजों को हटाने की प्रक्रिया के लिए संसद राष्ट्रपति को सुझाव देती है। इस प्रस्ताव की भाषा ‘मोशन फॉर प्रेजेंटिंग एन मोशन टू द प्रेसिडेंट फॉर रिमूवल ऑफ द जज’ होती है। 
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जहां तक जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ इस आशय का प्रस्ताव लाने की तैयारी की बात है तो निश्चित रूप से सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के खिलाफ यह पहला मामला है। इससे पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के एक-एक जज के खिलाफ इस आशय का प्रस्ताव लाया गया है। तब इसके कारण घोषित तौर पर पद का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार थे। मगर सीजेआई जस्टिस मिश्रा के खिलाफ लाया जाने वाला प्रस्ताव प्रथम दृष्टया राजनीतिक लगता है। 

सुप्रीम कोर्ट के जिस जज वी. रामास्वामी के खिलाफ लोकसभा में इस आशय का प्रस्ताव लाया गया था उन पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस रहते अधिकारिक तौर पर आवंटित मकान पर कब्जा करने का आरोप था। जबकि कलकत्ता हाईकोर्ट के जज सौमित्र सेन पर 24 लाख रुपये के गबन का आरोप था। जस्टिस रामास्वामी के खिलाफ कांग्रेस के लोकसभा में मतदान में हिस्सा न लेने के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। जबकि जस्टिस सौमित्र सेन के खिलाफ राज्यसभा में प्रस्ताव पारित हुआ, मगर लोकसभा में प्रस्ताव लाने से पहले ही उन्होंने पद छोड़ दिया। 
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मैं पूरे मामले को राजनीतिक इसलिए कह रहा हूं कि इससे पहले लाए गए दोनों जजों के खिलाफ प्रस्ताव पर सभी पक्षों में आम सहमति थी। जस्टिस रामास्वामी मामले में कांग्रेस ने अंत में मतदान में भाग नहीं लिया, मगर जस्टिस सेन के खिलाफ राज्यसभा में लाए गए प्रस्ताव के समर्थन में पड़े 172 और विरोध में पड़े 16 मत से आम सहमति की भावना दिखी थी। 

सीजेआई के मामले में यह आम सहमति दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती। प्रस्ताव लाने वाले सात दलों की संख्या लोकसभा में बेहद कम है तो राज्यसभा में भी इसके समर्थन के लिए जरूरी दो तिहाई संख्या के वह आसपास भी नहीं है। ऐसे में जाहिर तौर पर यह संदेश जा रहा है कि सीजेआई के खिलाफ विपक्ष राजनीतिक लड़ाई लड़ रहा है। मेरे हिसाब से न्यायपालिका जैसी महत्वपूर्ण संस्था के लिए यह राजनीतिक कदम उचित नहीं है। 
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(हिमांशु मिश्र से बातचीत पर आधारित)
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