गुजरात दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसायटी कांड में जिन 11 लोगों को उम्र कैद की सजा मिली है, उनमें कृष्णा कलाल का मामला शायद सबसे अलग है। इसकी वजह ये है कि कृष्णा कलाल की मां चंपाबेन ने 2002 दंगों के दौरान मुस्लिमों की जान बचाई थी।
वहीं उनके बेटे कृष्णा कलाल को गुलबर्ग कांड के दौरान हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है। चंपा बेन एक सरकारी अस्पताल में सफाई कर्मचारी हैं और उन्होंने गोधरा दंगों के दौरान अपने घर में दो मुस्लिम लोगों को पनाह दी थी। गोधरा दंगा भड़कने के बाद 28 फरवरी, 2002 को जब हिंसक भीड़ ने गुलबर्ग सोसायटी को घेर लिया था तब रहीम खान पठान और उनके बेटे मुशी खान पठान जान बचाकर भागते हुए गांधी चॉल आए थे। ये चॉल गुलबर्ग सोसायटी से 200 मीटर की दूरी पर था।
इसी चॉल में चंपाबेन का परिवार रहता था। चंपाबेन ने बीबीसी को बताया, "मैंने रहीम खान और उनके बेटे को अपने घर में पनाह दी। पुलिस आने तक इन दोनों को छिपाए रखा।" चंपाबेन के इस दावे की पुष्टि एसआईटी अदालत में सुनवाई के दौरान एक प्रत्यक्षदर्शी गवाह ने भी की थी। इब्राहिम चंडेल नामक यह गवाह रहीम खान और उनके बेटे के साथ पुलिस के शरणार्थी कैंप में रहा था।