केरल के तिरुवनंतपुरम में एक मां और बेटी ने खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली क्योंकि उनके ऊपर बैंक का सात लाख रुपये का कर्ज था। रकम न चुका पाने पर उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ता। उनकी उम्मीदें उस समय खत्म हो गई जब एक खरीददार आखिरी वक्त पर मुकर गया और इसी दिन को बैंक ने डेडलाइन घोषित किया हुआ था। जिसके बाद मंगलवार को उन्होंने खुद को आग लगा ली।
पुलिस का कहना है कि 42 साल की मां लेखा और उनकी 19 साल की बेटी वैष्णवी जलने की वजह से गंभीर हालत में हैं। उन्होंने अपने घर के एक कमरे में आग लगाई थी। जिससे पता चलता है कि वह आत्महत्या करना चाहती थीं। यह घटना नेयत्तीकारा में घटित हुई। जिसके बाद स्थानीय नागरिकों ने कैनरा बैंक में विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि बैंक के कर्मचारियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज होना चाहिए।
बैंक के कार्य पर निराशा व्यक्त करते हुए केरल के राजस्व मंत्री ई चंद्रशेखरन ने जिलाधिकारी से मामले की रिपोर्ट मांगी है। बैंक के कर्मचारी का कहना है कि उन्होंने 2003 में लिए लोन को चुकाने का समय दिया था और अदालत के आदेश के बाद वसूली की कार्रवाई शुरू की थी। पुलिस का कहना है कि वैष्णवी की मौके पर मौत हो चुकी है वहीं लेखा का स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है।
लेखा के पति और घर के मालिक चंद्रन हाल ही में गल्फ देश में कारपेंटर की नौकरी छूटने के बाद लौटे थे। उन्होंने रिपोर्टर को बताया कि उनकी पत्नी और बेटी डेडलाइन के खत्म होने की वजह से बिखर गए थे। चंद्रन और लेखा ने अपने घर का नाम अपनी इकलौती बेटी वैष्णवी के नाम पर वैष्णवम हाउस रखा था जो कॉलेज से डिग्री कोर्स कर रही थी।
उन्होंने कहा, 'मैंने घर बनाने के लिए 2003 में कर्ज लिया था। मैं पांच लाख रुपये वापस कर चुका हूं लेकिन वित्तीय संकट के कारण बाकी की राशि नहीं दे पाया। बैंक चाहता था कि मैं ब्याज सहित 6.80 लाख रुपये दूं। मैंने बैंक से अनुरोध किया था कि मुझे थोड़ा और समय दिया जाए। मैं कर्ज चुकाने के लिए घर बेचने को तैयार था लेकिन मेरी पत्नी और बेटी धमकी से डर गए और उन्होंने यह कदम उठा लिया।'