उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत देश के कुछ हिस्सों में एटीएम में फिर कैश की किल्लत होने लगी है। लखनऊ का हाल यह है कि मंगलवार को 90 फीसदी एटीएम खाली मिले। वहीं औद्योगिक शहर कानपुर में बैंकों में ज्यादा जबकि एटीएम में कम कैश की आपूर्ति की जा रही है। बैंकों के सूत्र बताते हैं कि ऐसी स्थितियां जानबूझ कर पैदा की जा रही हैं ताकि डिजिटल ट्रांजेक्शन में तेजी आए।
लखनऊ में आरबीआई की ओर से पिछले 20 दिन से कैश आपूर्ति नहीं हो रही है। बैंक अधिकारियों के अनुसार शाखाएं ग्राहकों द्वारा जमा कराए जा रहे रुपयों पर ही निर्भर हैं। इन्हीं रुपयों को शाखाओं और एटीएम में भेजा जा रहा है। परेशान लोगों का कहना है हालात नोटबंदी के दौर जैसे होने लगे हैं।
कानपुर में बीते एक हफ्ते से 70 फीसदी एटीएम में करेंसी नहीं है। इस औद्योगिक शहर में 300 करोड़ रुपये बैंकों के लिए और 200 करोड़ रुपये एटीएम के लिए हर रोज चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक यह रकम जारी की जा रही है लेकिन दावों के बावजूद भी अधिकांश एटीएम करेंसी की किल्लत से जूझ रहे हैं। उत्तराखंड में भी हालात कमोबेश यूपी के जैसे ही हैं। देहरादून में सरकारी हों या प्राइवेट, अधिकांश एटीएम खाली हैं। हालांकि दिल्ली-एनसीआर, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य है।
पर्याप्त नगदी न मिलने से बिगड़ी हालत
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एक सरकारी बैंक के मुख्यालय में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रिजर्व बैंक से पर्याप्त नकदी न मिलने की वजह से स्थिति बिगड़ी है। ग्राहकों को दिक्कत न हो, इसके लिए दिल्ली से मेरठ, मुरादाबाद, हरिद्वार, देहरादून आदि शहरों में नकदी भेजी जा रही है, फिर भी यह आपूर्ति मांग के मुकाबले कम पड़ रही है।
उत्तर प्रदेश में पदस्थ एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनके यहां एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात पैदा हो गए हैं। नकदी की कमी के चलते उनके बैंक की शाखाओं में पर्याप्त कैश की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। रिजर्व बैंक की कानपुर शाखा से बीते 15 दिन से करेंसी चेस्ट्स में नकदी की आपूर्ति न के बराबर है।
बैंक अधिकारी के मुताबिक जबसे कैश की किल्लत वाली बात फैली है, बैंकों से नकदी निकासी बढ़ गई है, जबकि नोट जमा कराने वाले एक चौथाई रह गए हैं। एक औसत कारोबारी दिन में जिन शाखाओं 40 लाख रुपये जमा हो रहे थे, वहां 10 लाख रुपये भी जमा नहीं हो पा रहे हैं। एक अग्रणी निजी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में यदि किसी करेंसी चेस्ट में हर रोज 100 करोड़ रुपये की आवश्यकता है तो रिजर्व बैंक से महज 10 से 15 करोड़ रुपये ही मिल पा रहे हैं। ऐसे में एटीएम में पैसे नहीं भरे जा रहे हैं, केवल शाखाओं पर बैंकिंग के लिए थोड़ी-थोड़ी रकम भेजी जा रही है।
वित्त मंत्रालय का दावा, स्थिति सामान्य
वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि देश भर में नकदी की आपूर्ति सुचारू रूप चल रही है। बैंकिंग डिवीजन के अधिकारिक सूत्रों का भी दावा है कि नए नोट भी पर्याप्त मात्रा में छापे जा रहे हैं। कुछ दिन पहले केरल में नकदी की किल्लत की बात सामने आई थी लेकिन अब वहां भी स्थिति सामान्य है।
यदि कहीं से नकदी की किल्लत की बात सामने आएगी तो उस हिसाब से कदम उठाया जाएगा। इस बारे में रिजर्व बैंक की प्रवक्ता से भी प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका जवाब नहीं आया।
नीति आयोग के सलाहकार ने दिए थे संकेत
डिजिधन मेले में भाग लेने आए नीति आयोग के सलाहकार आलोक कुमार ने पहले ही संकेत दिया था कि डिजिटल भुगतान में कमी आ रही है इसलिए संभव है कि आने वाले दिनों में कैश के फ्लो पर लगाम लगा दी जाए।