रिपोर्ट बताती है कि देश के कुल सड़क नेटवर्क में अधिकतर सड़क दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) पर ही हुई हैं। देश के कुल सड़क नेटवर्क में एनएच की हिस्सेदारी महज 1.94 फीसदी ही है जबकि कुल सड़क दुर्घटनाओं में इसकी हिस्सेदारी 30.2 फीसदी है। साल 2018 के दौरान सड़क दुर्घटना की वजह से हुई कुल मौतों में 35.7 फीसदी मौत एनएच पर ही हुई।
कुल सड़क में राज्य के राजमार्गों में सड़क की लंबाई का 2.97 फीसदी हिस्सा है जबकि दुर्घटना में इसकी हिस्सेदारी 25.2 फीसदी जबकि मौत में इसकी हिस्सेदारी 26.8 फीसदी है। अन्य सड़कें, जो कुल सड़कों का लगभग 95.1 फीसदी है, क्रमश: 45 फीसदी दुर्घटनाओं और 38 फीसदी मौतों के लिए जिम्मेदार थीं।
सड़क दुर्घटना में हुई मौत में उपयोगकर्ता के लिहाज से देखें तो इसमें सबसे ज्यादा पैदल चलने वालों ने जान गंवाई। इनकी हिस्सेदारी 15 फीसदी रही। इसमें साइकिल चालकों की हिस्सेदारी 2.4 फीसदी और दोपहिया वाहनों चालकों की हिस्सेदारी 36.5 फीसदी थी। इन तीनों को मिला दें तो सड़क दुर्घटना में हुई मौत में इन तीनों की संयुक्त हिस्सेदारी 53.9 फीसदी रही। यदि दुनिया भर के अन्य देशों से तुलना करें तो कह सकते हैं कि भारतीय सड़कें दुनिया में बेहद असुरक्षित हैं।