जलवायु परिवर्तन के कारण 80 फीसदी किसान प्रभावित
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न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इन दिनों पूरे जर्मनी के यार्डों और बालकनी की रेलिंग पर सोलर पैनल लटकते दिख रहे हैं, जो सस्ते दामों और सरकार की ओर से सरल किए गए कड़े नियमों के कारण संभव हो पाया है। रूस-यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद जर्मनी में बिजली की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और अब वे लगभग 25 यूरो सेंट प्रति किलोवाट तक पहुंच गई हैं। यह यूरोप में बिजली की सबसे महंगी दर है। यह भी एक कारण है, जिसकी वजह से जर्मनी में तेजी से सोलर पैनल का प्रसार हो रहा है।
बिजली कर्मचारी की जरूरत नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, पूरे जर्मनी में लोग बिजलीकर्मी और भारी औजारों की जरूरत के बिना हल्के सोलर पैनल स्वयं ही लगा रहे हैं। राजधानी बर्लिन में सस्टनेबिलिटी (स्थिरता) के लिए आयोजित व्यापार मेले में एक ऐसा नया गैजेट तेजी से लोकप्रिय हुआ जो एक सोलर पैनल जितना छोटा था और उसे बालकनी के किनारे लगे तारों पर आसानी से लटका कर लगाया जा सकता है। फिर उसे दीवार के सॉकेट में प्लग करके सीधे अपने घर में सूरज से पैदा होने वाली ऊर्जा पहुंचाई जा सकती है।
लैपटॉप, छोटा रेफ्रिजरेटर आसानी से चार्ज
प्रत्येक हल्के पैनल से एक लैपटॉप और छोटा रेफ्रिजरेटर चार्ज करने के लिए पर्याप्त बिजली मिलती है। जर्मनी में यह बड़ा परिवर्तन नया आकार ले रहा है। इससे हरित क्रांति को और बढ़ावा मिल रहा है। इस परिवर्तन का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि इसके लिए लोगों को कोई बड़ा निवेश करने की जरूरत नहीं होती।
यह जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए भी यह बेहद कारगर तरीका है।