समय पर अपील दाखिल करने पर याचिका पर सुनवाई न होने से वादियों को बेहद परेशानी होती है। अदालत का मानना है कि राज्य द्वारा अपील दायर करने में देरी पर रियायत नहीं मिलनी चाहिए लेकिन बात जब देश की सुरक्षा और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र से जुड़ा हो तो राज्य द्वारा की जाने वाली इस तरह की देरी में रियायत दी जानी चाहिए और मेरिट के आधार पर सुनवाई की जानी चाहिए।
मौजूदा मामले में एक अदालती फैसले के जरिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जमीन को किसी व्यक्ति को देेने का आदेश दिया गया था। इस मामले में मणिपुर सरकार, राज्य के पुलिस महानिदेशक और मणिपुर राइफल्स के 8वें बटालियन के कमांडर प्रतिवादी थे।
राज्य को यह जमीन खाली करने के लिए कहा गया था। राज्य सरकार ने पहले इस फैसले के खिलाफ जिला जज के समक्ष अपील दायर की थी लेकिन वह उचित फोरम नहीं था। इस वजह से उचित अपीलीय अदालत में अपील दायर करने में राज्य सरकार व अन्य को करीब एक महीने की देरी हो गई। इस आधार पर उनकी अपील पर हाईकोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने पाया कि अपील दायर करने को लेकर सरकार के पास कोई वाजिब वजह नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-136 का इस्तेमाल करते हुए राज्य सरकार को उचित फोरम में अपील दायर करने की इजाजत दे दी है।