अब सवाल यह आता है कि कार में एयरबैग कैसे काम करता है? दरसल गाड़ी के बंपर पर एक इंपैक्ट सेंसर लगा होता है जैसे ही गाड़ी किसी चीज से टकराती है तो इंपैक्ट सेंसर की मदद से एक हल्का सा करंट एयरबैग के सिस्टम में जाता है और एयरबैग के अंदर एक गैस (sodium azide) भरी होती है उस गैस को वह गैस फॉर्म में प्ले आता है पहले यह किसी और फॉर्म भरी होती है जैसे इंपैक्ट सेंसर करंट भेजता है वह चीज गैस के रूप में परिवर्तित हो जाती है। एयरबैग कॉटन से बना होता है और इस पर सिलिकॉन की कोटिंग की जाती है। आपको बता दें कि एक सेकंड से भी कम समय (लगभग 1/20 सेकंड) में लगभग 300 किमी/घंटा की स्पीड से बंद एयरबैग फूलता है।
जिसे तरह हर चीज की एक्सपायरी डेट होती है। ठीक उसी तरह से एयरबैग की भी एक्सपायरी डेट होती है। कुछ समय बाद एयरबैग भी रिप्लेसमेंट मांगते हैं। हालांकि एयरबैग के फंक्शन के लिए जिन पार्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है वे काफी मज़बूत होते हैं, लेकिन काफी हद तक एयरबैग इग्नाइटर पर भी निर्भर करता है।
कई बार देखने में आया है की एयरबैग इतनी स्पीड से खुलता है लोगों की जान भी जा चुकी है। भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बघौला गांव के समीप आगे चल रहे एक कैंटर ने अचानक ब्रेक लगा दी, जिससे पीछे आ रही गाड़ी, कैंटर से जा टकर। दुर्घटना में कार चालक को गंभीर चोटें आईं। दुर्घटना के दौरान गाड़ी में लगा एयर बैग इतनी तेजी से खुला कि उसके तेज प्रेशर से ड्राईवर का लीवर फट गया जिससे उसकी मृत्यु हो गयी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कार की सीट बेल्ट का भी एयरबैग की फंक्शन से लिंक होता है। एयरबैग को बनाते वक्त इस बात का भी ख्याल रखा जाता है कि गाड़ी में बैठे आदमी ने सीट बेल्ट लगा रखा हो। इसलिए सिर्फ एयरबैग के भरोसे ना बैठें। गाड़ी में बैठते ही सीट बेल्ट जरूर लगाएं। अगर एक्सीडेंट या फिर किसी और दुर्घटना या किसी और वजह से आपकी कार का एयरबैग खुल जाता है तो किसी ऑथोराइज्ड डीलरशिप या वर्कशॉप में ही उसे ठीक करवाएं ताकि किसी भी तरह की चूक से बचा जा सके। चाइल्ड सीट को कभी भी एयरबैग के सामने ना रखें।