कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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देश में अब तक कोरोना वायरस के तीन से भी अधिक रूपों से ग्रस्त 1189 संक्रमित मिल चुके हैं। पिछले तीन महीने में 13 हजार से अधिक संक्रमितों के सैैंपल की जीनोम सीक्वेसिंग के बाद पता चला है कि देश में ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के अलावा कोरोना का भारतीय रूप भी मरीजों में मिल रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया है कि 1109 मरीजों में ब्रिटेन से भारत आए कोरोना के नए रूप का पता चला है। वहीं, 79 लोगों में दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में तेजी से फैले वायरस के प्रकारों में एक भारतीय मरीज में मिल चुका है।
इनके अलावा 10 संक्रमित मरीजों के सैंपल में वे वैरिएंट मिले हैं जो भारत में ही पाए गए हैं। अमर उजाला ने शुक्रवार को खुलासा किया था कि एक ही इलाके में तीन से अधिक तरह का कोरोना वायरस मिल रहा है, जबकि 10 राज्यों में दो तरह के वायरस मिलने की पुष्टि हुई है। इसे लेकर केंद्र सरकार ने 10 राज्यों में निगरानी टीम को सतर्कता बरतने का आदेश भी दिया।
खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए न सिर्फ इस पर आधिकारिक मुहर लगाई, बल्कि उन्होंने यह भी बताया कि राज्यों की ओर से मांग मिलने के बाद एनसीडीसी उनके लिए विशेषतौर पर जीनोम सीक्वेसिंग कर रहा है।
बीते आठ अप्रैल को हिमाचल, 26 मार्च को पंजाब, 10 अप्रैल को राजस्थान और महाराष्ट्र से आए सैंपल की सीक्वेसिंग करने के बाद रिपोर्ट भी जारी कर चुका है। हाल ही में एनसीडीसी ने चंडीगढ़ से आए सैंपल में से 70 फीसदी में यूके वैरिएंट की पुष्टि की थी।
वायरस के नए रूप से बचाव के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट पर जोर
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि नए नए वैरिएंट्स से बचाव के लिए ही आरटी-पीसीआर जांच पर जोर देने के लिए कहा जा रहा है। इस तकनीक के कम इस्तेमाल करने से वायरस के प्रभावों को समझने में कामयाबी नहीं मिल सकती है और इसके फैलाव को भी नहीं रोक सकते।