फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक लाख ऑटो में चार लाख से ज्यादा मजदूर घरों के लिए रवाना, तय करनी है 2000 किमी. की दूरी

Wed, 13 May 2020 02:41 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

  • महाराष्ट्र से प्रवासी मजदूर ऑटो से अपने गृह राज्य रवाना हुए
  • एक लाख ऑटो में लगभग चार लाख मजदूर सवार होकर महाराष्ट्र के शहरों से निकले
विज्ञापन
ऑटो से घर जाते प्रवासी मजदूर - फोटो : Twitter
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लॉकडाउन के कारण महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई, पुणे, ठाणे, विरार, नवी मुंबई में लाखों प्रवासी मजदूर फंस गए हैं। सरकार द्वारा श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के संचालन के बाद भी कुछ मजदूरों ने खुद ही घरों की तरफ जाने का निर्णय लिया है। ये मजदूर पैदल या अपने वाहनों से गृह राज्य जा रहे हैं। 

विज्ञापन


इन शहरों से एक लाख के करीब रिक्शा चालक अपने 200 सीसी की क्षमता वाले छोटे ऑटो को लेकर 1500 से 2000 किलोमीटर का सफर तय करने के लिए निकल चुके हैं। हर एक ऑटो में कम से कम चार प्रवासी सवार हैं। 

इनका कहना है कि लॉकडाउन लागू हुए दो महीने हो चुके हैं और अब इंतजार नहीं किया जा सकता है। इन लोगों ने बताया कि इनके पास खाने के पैसे खत्म हो रहे हैं और इस कारण इन्होंने ऑटो रिक्शा से ही घर जाने का निर्णय लिया है। ये ऑटो वाले ज्यादातर उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के रहने वाले हैं। 
विज्ञापन


इन्हीं में एक रिक्शा चालक ने बताया कि वह अपने दो बच्चों, बूढ़ी मां और पत्नी के साथ महाराष्ट्र के नवी मुंबई में रहता था, लेकिन लॉकडाउन के कारण वह फंस गया। इसलिए उसने परिवार के साथ अपने घर बनारस जाने का फैसला किया। नवी मुंबई से बनारस तक की दूरी 1700 किलोमीटर है। 



रिक्शा चालक ने बताया कि इस पूरे सफर में सात से आठ हजार रुपये का पेट्रोल खर्च होगा। उसने बताया कि एक दिन तीन से चार सौ किलोमीटर की दूरी तय कर ली जाती है, लेकिन गर्मी की वजह से ऑटो खराब हो जा रहे हैं। 

उसने बताया कि नवी मुंबई में एक पार्टी के लोगों ने खाने का इंतजाम किया था, लेकिन वह पर्याप्त नहीं था। रिक्शा चालक ने बताया कि रास्ते में सफर के दौरान हमें लोगों से जो खाना मिल रहा है, उसी से गुजारा किया जा रहा है। 
विज्ञापन


ऐसे ही एक अन्य ऑटो चालक ने बताया कि लोग घर जाने के लिए इस कदर बैचेन हो गए हैं कि उन्हें जो मिल रहा है, फिर वो चाहे बाइक, साइकिल हो या ठेला उस पर सवार होकर गांव जा रहे हैं। उसने बताया कि पुणे-मुंबई एक्सप्रेस वे पर प्रवासी मजदूरों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि कसारा घाट पार करने में चार घंटे लग गए, जिसे पहले 40 मिनट में ही पार कर लिया जाता था। 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें