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कोरोना की दूसरी लहर में सिर चढ़ कर बोल रही है 'प्राण वायु', दो घंटे की ऑक्सीजन के लिए लग रहे हैं 5000 रुपये

Thu, 22 Apr 2021 05:01 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अगर देश की मौजूदा स्थिति को देखें तो एक दिन में 900 करोड़ लीटर से अधिक ऑक्सीजन की जरूरत है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के साथ ही ऑक्सीजन की मांग में भी तेजी से उछाल आ गया है। कोरोना की पहली लहर के मुकाबले इस बार करीब चार गुना अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है...
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देश में ऑक्सीजन सिलिंडर की किल्लत - फोटो : pixabay
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने देश में कहर बरपा रखा है। अनेक जगहों पर मरीजों को 'प्राण वायु' यानी ऑक्सीजन की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी मेडिकल संस्थानों में 'ऑक्सीजन' की कमी होने की खबरें सुनाई पड़ रही हैं। कोरोना संक्रमण की वजह से 'ऑक्सीजन' के दाम आसमान छूने लगे हैं। मौजूदा हालात में ऑक्सीजन की मांग, सप्लाई और कीमत का विश्लेषण करें तो इस नतीजे पर पहुंचते हैं कि दो घंटे की ऑक्सीजन के लिए औसतन पांच हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।

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बाजार और ई-कॉमर्स की दुनिया में ऑक्सीजन सिलेंडर के दाम तीस फीसदी तक बढ़ चुके हैं। ऑक्सीजन 'कंसंट्रेटर' (पांच एलपीएम) जो कोरोना संक्रमण से पहले लगभग 30 हजार रुपये से 40 हजार रुपये में मिल रहे थे, अब उनकी कीमत 65 हजार के पार चली गई है। ऑक्सीमीटर, स्टीम इन्हेलर, प्लस डोज अलार्मिंग रेगुलेटर व थर्मामीटर आदि मेडिकल उपकरणों की किल्लत सामने आ रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कथित तौर पर ऑक्सीजन का बड़ा सिलेंडर 90 हजार रुपये और छोटा सिलेंडर 60 हजार रुपये में बिकने की खबर सामने आई हैं।

अगर देश की मौजूदा स्थिति को देखें तो एक दिन में 900 करोड़ लीटर से अधिक ऑक्सीजन की जरूरत है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के साथ ही ऑक्सीजन की मांग में भी तेजी से उछाल आ गया है। कोरोना की पहली लहर के मुकाबले इस बार करीब चार गुना अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। नेशनल क्लीनिकल रजिस्ट्री के अनुसार, कोरोना संक्रमण से पीड़ित जो मरीज किसी अस्पताल में दाखिल होते हैं, उनमें से 47.5 फीसदी मरीजों को सप्लीमेंटरी ऑक्सीजन की जरुरत पड़ती है।

कोविड टास्क फोर्स के अनुसार, गत सोमवार को कोविड के जितने मरीज आए, उनमें से 54.5 फीसदी मरीजों को ऑक्सीजन देनी पड़ी। ऑनलाइन मार्केट की बड़ी वेबसाइट्स पर पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर आउट ऑफ स्टॉक हैं। अगर कहीं मिल रहे हैं तो कुछ चुनींदा इलाकों में ही उसकी डिलीवरी हो पाती है। बताया जा रहा है कि कई कंपनियों को दो सप्ताह तक अपनी सेल बंद करनी पड़ी है, क्योंकि उनके पास स्टॉक नहीं आ पा रहा था।

कोरोना की दूसरी लहर में पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर के रेट में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। ऑनलाइन मार्केट में ऑक्सीजन की बी टाइप सिलेंडर किट छह से 12 हजार रुपये की रेंज में मिल रही है। साढ़े चार सौ लीटर की ऑक्सी 99 किट के रेट भी 19 हजार रुपये तक जा चुके हैं। यदि इस सिलेंडर का फ्लो रेट दो एलपीएम रखें तो यह केवल चार घंटे ही चल सकेगा। सीएपीएफ के वरिष्ठ डॉक्टर राजकुमार कहते हैं कि कोरोना संक्रमण से पीड़ित एक मरीज को औसतन छह से सात एलपीएम की दर पर ऑक्सीजन देनी पड़ती है।

सामान्य वातावरण में एक व्यक्ति को 11 हजार लीटर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। इसकी शुद्ध मात्रा देखें तो वह 550 लीटर रह जाती है। यदि हालत ज्यादा गंभीर होती है तो ऑक्सीजन का फ्लो रेट 60 एलपीएम तक बढ़ाना पड़ सकता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना की दूसरी लहर में एक दिन में ऑक्सीजन पर कितने पैसे खर्च होते हैं।

पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर के दाम भी लगातार बढ़ते रहे हैं। पांच एलपीएम वाले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर 40 हजार रुपये से 70 हजार रुपये में मिल रहे हैं। दस एलपीएम वाले कंसन्ट्रेटर की कीमत 70 हजार रुपये से लेकर एक लाख तीस हजार रुपये तक बताई गई है। वहीं प्लस फ्लो रेट वाले कंसंट्रेटर डेढ़ लाख रुपये से ढाई लाख रुपये में मिल रहे हैं। कोरोनाकाल से पहले की बात करें तो कई जाने माने ब्रांड जैसे मेडटेक, कोस्मोकेयर, फिलिप्स व नीडेक के पांच एलपीएम वाले कंसंट्रेटर की कीमत 30 हजार से 42 हजार रुपये होती थी। ई-कॉमर्स वेबसाइट के मुताबिक, अब वह कंसन्ट्रेटर 60 हजार रुपये तक के दाम पर बिक रहा है। साल 2019 में कंसन्ट्रेटर के ग्लोबल मार्केट की वेल्यू 1.7 बिलियन डॉलर थी, तो अब कोरोना के बढ़ते केसों के मद्देनजर अर्थशास्त्रियों ने यह अंदाजा लगाया है कि साल 2026 तक यह मार्केट वेल्यू पांच बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।
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ऑक्सीमीटर के ग्लोबल मार्केट में भी बदलाव देखा जा रहा है। कोरोना की पहली एवं दूसरी लहर में पल्स ऑक्सीमीटर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया है। वजह, इसकी मदद से कोई भी व्यक्ति यह पता लगा सकता है कि उसके खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल कितना है। डॉक्टरों के मुताबिक, कम लक्षणों वाले मरीजों को भी तीन-चार बार अपना ऑक्सीजन लेवल जांचना चाहिए। दिल्ली सरकार ने कोरोना की पहली लहर में सभी मरीजों को यह उपरकण मुहैया कराया था। इसके बाद कई दूसरे राज्यों ने भी ऑक्सीमीटर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है।

साल 2019 में ऑक्सीमीटर का बाजार 1892 मिलियन डॉलर था, तो वहीं 2020 में यह बाजार 23 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। अगले छह सालों में यह बाजार 3693 मिलियन डॉलर तक जाने की संभावना है। इससे मालूम होता है कि कोरोना संक्रमण लंबे समय तक अपना असर दिखा सकता है। पिछले एक माह के दौरान बुखार को नियंत्रित करने वाली दवाओं की मांग और सप्लाई में बदलाव आया है। मार्च की तुलना में अप्रैल के दौरान पैरासिटामोल की मांग में 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी ओर डोलो-650 टेबलेट की मांग भी लगातार बढ़ती जा रही है।
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