उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरे साल गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ने से जहां किसान परेशान हैं। वहीं जिम्मेदार इसकी वजह गन्ने का बढ़ता रकबा, चीनी का अधिक उत्पादन और मिलों की खस्ता हालत बता रहे हैं। पिछले 4 साल में गन्ने का रकबा करीब 10 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। मिलों के पास चीनी का सरप्लस स्टॉक वर्ष 2021 में करीब 50 लाख टन पहुंच गया है। चीनी का उपयोग करने वाले शीतल पेय और रेस्टोरेंट बंद होने से खपत में भारी कमी आई।
चालू सत्र में 110 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान
चालू पेराई सत्र में 105 से 110 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। वर्ष 2017-18 चीनी की बचत 9.09 लाख टन थी। 2018-19 33.50 लाख टन, 2019-20 में 50.29 लाख टन उत्पादन पहुंच गया। यही सरप्लस चीनी का सरप्लस स्टॉक 2020-21 में भी करीब 50 लाख टन है।
सरकार-मिलें दोनों जिम्मेदार
गन्ने के बढ़ते रकबे और उत्पादन पर किसान अरविंद शर्मा कहते हैं, इसके लिए सरकार और मिल मालिकों दोनों की कमी है। एक तरफ चीनी मिलें किसानों को अच्छे बीज और दवाइयां देकर उत्पादन बढ़ाने की बात कहती हैं।
कम खपत और अधिक उत्पादन ने बांधे सरकार के हाथ
दूसरी और खरीद की पर्ची कम देती है। 1 एकड़ पर 180 क्विंटल की पर्ची आती है और पैदावार 5 क्विंटल तक होती है, तो किसान क्या करें? बाकी बचे गन्ने को औने-पौने दाम पर कोल्हू-क्रशर पर बेचना पड़ता है जो 250 प्रति क्विंटल से अधिक दाम नहीं देते।
सरकार की कमी पर अरविंद कहते हैं, चाहे जो भी सरकार रही हो शुगर लॉबी के दबाव में काम करती है। चीनी मिलों के लिए सब्सिडी लोन पर किसानों के लिए कुछ नहीं। गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी होने से मुजफ्फरनगर गांव के किसान कहते हैं, 1 एकड़ में करीब 70 हजार रुपये का खर्च आता है। अगर सब सही रहा तो 90 हजार रुपये का गन्ना पैदा होता है। ऐसे में परिवार कैसे चले?
चीनी मार्केट में ब्राजील का कब्जा : विक्रम शिंदे
देश की चीनी मिलों को टेक्निकल सपोर्ट करने वाली संस्था भारतीय शुगर के अध्यक्ष विक्रम शिंदे कहते हैं कि देश में चीनी का उत्पादन कम करना चाहिए। जितनी जरूरत है उतना उत्पादन करके बाकी का एथेनॉल बनाया जाए। शिंदे कहते हैं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के रेट तो भारत से भी कम हैं। इस पर ब्राजील का कब्जा है। वह ज्यादा एथेनॉल बनाता है और चीनी को सस्ते भाव में भेज देता है।
बिगड़ी गन्ना पेराई व्यवस्था को सुधारा
हमारी सरकार ने पिछले 6 साल का गन्ना का भुगतान किया है। बिगड़ी पैराई व्यवस्था को सुधारा गया है। जहां पहले हर साल 18,000 करोड़ रुपये की गन्ना की खरीद होती थी। इस साल 35,000 करोड़ की खरीद हो चुकी है। सपा सरकार ने अपने 5 वर्ष में 95,200 करोड़ रुपए का भुगतान किया था। योगी सरकार ने 4 वर्षों में ही 1,23,000 करोड़ रुपए का गन्ना बकाया भुगतान किया है।
- सुरेश राणा, मंत्री, गन्ना विकास