अपराध की उलझी गुत्थियां सुलझाने में सूबे की पुलिस को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह डीएनए टेस्ट के लिए 20 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में सिर्फ एक ही लैब का होना है। आलम यह है कि लखनऊ फोरेंसिक साइंस लैब में 2500 से अधिक नमूनों का परीक्षण लंबित है।
लखनऊ फोरेंसिक साइंस लैब में अगर कोई केस आज भेजा जाए तो रिपोर्ट मिलने में कम से कम एक साल का समय लगेगा। नमूनों के इस बोझ को देखते हुए शासन ने आगरा और वाराणसी लैब में भी डीएनए यूनिट को मंजूरी दे दी है। इन्हें इसी वर्ष शुरू किए जाने की योजना है। लखनऊ लैब में डीएनए परीक्षण शुरू हुए लगभग दो वर्ष ही हुए हैं। यहां वैज्ञानिक तो कम हैं ही मामले भी अधिक आ रहे हैं। नतीजा नमूनों का अंबार लग गया है।
आगरा से भेजे गए तीन केस को छह से आठ महीने हो चुके लेकिन रिपोर्ट नहीं आई है। इनमें से एक मामला शहर के पाश इलाके खंदारी में मां-बेटी की हत्या का है। आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डॉ. एके मित्तल का कहना है कि खून के नमूनों से डीएनए परीक्षण में सात दिन लगते हैं। अगर सैंपल बाल का है, तो इसमें कुछ अधिक समय लगता है। बोन मैरो से परीक्षण में तीन सप्ताह तक लग जाते हैं।