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नागरिकता कानून को मिला हजारों शिक्षाविदों का समर्थन, प्रदर्शनकारियों से की संयम बरतने की अपील

Sat, 21 Dec 2019 09:39 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नागरिकता कानून - फोटो : Amar Ujala Graphics
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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच भारत के कई विश्वविद्यालयों के करीब 1,100 शिक्षाविदों एवं शोध विशेषज्ञों ने शनिवार को समर्थन में बयान जारी किया है। शिक्षाविदों ने अपने बयान में समाज के प्रत्येक वर्ग से संयम बरतने, दुष्प्रचार रोकने और सांप्रदायिकता एवं अराजकता के जाल में नहीं फंसने की अपील की है।

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बयान में कहा गया है हम बेहद गुस्से के साथ इस बात की ओर भी ध्यान दिलाना चाहते हैं कि जानबूझ कर तनाव एवं भय की अफवाह फैला कर देश में डर एवं उन्माद का माहौल बनाया जा रहा है, जिससे देश के कई हिस्सों में हिंसा हो रही है।

इस बयान के हस्ताक्षरकर्ताओं ने अल्पसंख्यकों के साथ खड़े होने और भारत के सभ्यतागत स्वभाव को बरकरार रखने तथा धार्मिक प्रताड़ना के कारण भाग कर आने वालों को शरण देने के लिए संसद को बधाई भी दी है।
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इसमें कहा गया कि यह कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना झेलने वाले अल्पसंख्यकों को शरण देने की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है। बयान में कहा गया कि 1950 के लियाकत-नेहरू संधि की विफलता के बाद से, कांग्रेस, माकपा जैसे राजनीतिक दलों के कई नेताओं ने दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की मांग की थी। इनमें से ज्यादातर दलित समुदाय से हैं।

इसमें कहा गया हम इस बात से संतुष्ट हैं कि पूर्वोत्तर राज्यों की चिंताओं को सुना गया और उचित ढंग से उनका समाधान किया गया। हमारा मानना है कि सीएए पूरी तरह भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान के अनुरूप है, क्योंकि यह किसी भी देश के किसी भी धर्म के किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता पाने से नहीं रोकता है।

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