भारत में इन दिनों शायद गुलमर्ग ही इकलौती जगह है, जहां देवदार के पेड़ों तले बर्फ की चादर पर जीवन सरपट दौड़ रहा है। महामारी और सरहदी तनाव के बावजूद इस कश्मीरी पर्वतीय क्षेत्र में अबकी बार दशकों बाद सबसे ज्यादा लोग स्कीइंग करने पहुंचे हैं।
जानकारों का कहना है कि महामारी के चलते विदेशों में स्कीइंग ठप रहने का फायदा हिमालय की गोद में बसे गुलमर्ग को मिला है। साथ ही लोगों ने मानसिक सुकून के लिए भी प्रकृति का रुख किया है।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मार्च के पहले पखवाड़े तक 1.60 लाख से ज्यादा लोग नैंसर्गिक सौंदर्य से भरपूर इस इलाके का रुख कर चुके थे। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले 10 गुना तो पिछले तीन दशकों की तुलना में कई गुना ज्यादा है।
स्थानीय दुकानों पर अब विश्वस्तरीय सामान
स्थानीय लोगों का कहना है कि 90 के दशक तक यहां सिर्फ विदेशी लोग ही स्कीइंग करने आते थे और उनके भ्रमण पर ही हमारा गुजारा होता था। फिर खुद कश्मीरियों ने स्कीइंग करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे अन्य राज्यों के लोग भी इसका लुत्फ उठाने आने लगे।
लॉकडाउन के कारण आजकल विदेशी पर्यटक भले ही न आ रहे हों पर देसी लोगों का भारी जमावड़ा है। दुकानों पर स्कीइंग से जुड़ा विश्वस्तरीय साजो-सामान मिलने लगा है।
तीन हजार का कमरा अब 15 हजार में
गुलमर्ग में स्कीइंग और सैर-सपाटे से 20 हजार से ज्यादा स्थानीय लोगों की आजीविका चल रही है। यहां कई छोटी-बड़ी दुकानों के साथ 40 होटल भी संचालित हो रहे हैं।
हालांकि, इस साल डेढ़ लाख से ज्यादा लोग पहुंचे तो एक रात के लिए होटलों का दैनिक किराया औसतन तीन हजार से बढ़कर 15 हजार रुपये तक पहुंच गया। फ्रांस की उद्यमी फैनी गोडरा कहती हैं कि यहां बार कोई आ जाए तो बार-बार आने का मन करता है।
स्कीइंग के साथ-साथ हिम तेंदुए के दर्शन भी
वैसे गुलमर्ग एशिया का सबसे बड़ा और ऊंचाई पर स्थित स्की क्षेत्र है, जहां हर साल हजारों स्कीयर्स आते हैं। पिछले कुछ समय में यहां लोगों की ज्यादा आवक का बड़ा कारण सस्ते होटल, खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य और साफ आबोहवा होना माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि इस इलाके में स्कीइंग करते-करते कई दफा लोगों को हिम तेंदुए (स्नो लैपर्ड) और भूरे भालू जैसे वन्यजीव भी देखने को मिल जाते हैं। स्कीइंग के अलावा यहां रिकॉर्ड 13,800 फुट की ऊंचाई पर केबल कार की सवारी करने की लुत्फ भी उठाया जा सकता है।