बेरोजगारी की समस्या भारत में लगातार बढ़ती जा रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई में लाखों रुपये खर्च करने के बाद छात्र चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं। वहीं रोजगार देने वाली एजेंसियों को भी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्टार्टअप्स, ई-कॉमर्स और खुदरा फर्मों के कारण दक्षिण भारत में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लेकिन अगर टैलेंट की बात की जाए तो उत्तर भारत के लोगों में दक्षिण के मुकाबले अधिक टैलेंट है। यही कारण है कि नौकरी की तलाश में उत्तर से दक्षिण की ओर जाने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
रैंडस्टैड इंडिया और टीमलीज कंपनियों के मुताबिक नौकरी के 40 फीसदी पद दक्षिण भारत में मौजूद हैं जबकि पश्चिम में 28 फीसदी, उत्तर में 25 फीसदी और पूर्व में 7 फीसदी है। फॉर्मल सेक्टर में नौकरी की बात की जाए तो आधी से भी ज्यादा नौकरियां बंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद में उपलब्ध हैं। भारत में आईटी सेक्टर के तीन बड़े केंद्र बंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद इस सेक्टर के 60 फीसदी से भी अधिक लोगों को
नौकरी के अवसर देते हैं। वहीं चेन्नई और हैदराबाद विनिर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर के सबसे बड़े केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं।
रैंडस्टैड इंडिया के एमडी पॉल ड्यूपस के मुताबिक दक्षिण भारत आईटी और उससे संबंधित सेक्टरों में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ा रहा है। यह विभिन्न कंपनियों की शुरुआती बढ़त में मददगार साबित होगा।
इसके अलावा ग्रांड फोर्स इंडिया कंपनी के एचआर हेड नरेश राजेंद्रन का कहना है कि अन्य क्षेत्रों से आने वाले लोगों को यहां अलग भाषा और खानपान से संबंधित परेशानी हो सकती है। लेकिन उनमें से टैलेंटेड लोगों की तलाश करने में कंपनी को कोई मुश्किल नहीं आती। उन्होंने कहा यहां ज्ञान की प्रवृति देखने को मिलती है जिस कारण यहां आईटी, ऑटोमोटिव, रिटेल, ई-कॉमर्स और अन्य इन्फ्रास्ट्रचर में नौकरी के लिए विभिन्न क्षेत्रों से टैलेंट आता है।