गुजरात के मोरबी पुल हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। वहीं मोरबी पुल हादसे मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को 14 नवंबर को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। याचिका में दुर्घटना की जांच रिटायर्ड जज के नेतृत्व में कराए जाने की मांग की गई है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने याचिका पर फैसला लिया। साथ ही मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित ने याचिकाकर्ता विशाल तिवारी से पूछा कि आपकी क्या प्रार्थना है तो वकील विशाल ने जवाब दिया कि मैं न्यायिक जांच आयोग की मांग कर रहा हूं।
वकील द्वारा दायर याचिका में राज्य सरकारों को पर्यावरण को नुकसान के बिना निर्माण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुराने और जोखिम भरे स्मारकों और पुलों के सर्वेक्षण के लिए एक समिति बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही राज्यों में स्थायी आपदा जांच टीम गठित करने की मांग की है कि जब कोई ऐसी त्रासदी होगी तो जांच टीम तुरंत उस पर काम करेगी।
130 से ज्यादा लोगों की मौत
रविवार को मोरबी माचू नदी पर पुल के गिरने से 130 से अधिक लोगों की मौत हो गई और लगभग 100 घायल हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग आठ महीने तक पुल को मेंटेनेंस के लिए बंद रखा गया था और मरम्मत का काम एक निजी एजेंसी को सौंपा गया था। वहीं गुजरात सरकार ने पुल ढहने की घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का भी गठन किया है।
पुल की मरम्मत करने वाली फर्म पर पड़ा ताला
मोरबी पुल का रखरखाव व संचालन करने वाली ओरेवा फर्म पर ताला पड़ा मिला है। अभी तक इस मामले में ओरेवा कंपनी के मैनेजर समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।