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Moonlighting : मूनलाइटिंग क्या है और उद्योग क्षेत्र में इस टर्म का मतलब क्या है? जानिए क्या कहते हैं जानकार

Tue, 06 Sep 2022 08:57 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जब कोई कर्मचारी अपनी नियमित नौकरी के साथ ही किसी अन्य कंपनी या प्रोजेक्ट के लिए भी काम करता है तो उसे तकनीकी तौर पर मूनलाइटिंग कहा जाता है।
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मूनलाइटिंग (सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आईटी प्रोफेशनल्स के बीच इन दिनों मूनलाइटिंग की खूब चर्चा हो रही है। इसके बढ़ते चलन ने इंडस्ट्री में एक नई बहस शुरू कर दी है। कई लोगों का मानना है कि इससे कर्मचारियों को कार्यस्थल पर लौटने के साथ इससे जुड़ी चिंताएं भी कम होंगी। 
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मूनलाइटिंग का मतलब क्या है?
जब कोई कर्मचारी अपनी नियमित नौकरी के साथ ही किसी अन्य कंपनी या प्रोजेक्ट के लिए भी काम करता है तो उसे तकनीकी तौर पर मूनलाइटिंग कहा जाता है। कई लोग बिना कंपनी को जानकारी दिए दूसरी कंपनिया या प्रोजेक्ट के लिए काम करते हैं। 

फ्रीलांसिंग से इस तरह अलग है मूनलाइटिंग
ये फ्रीलांसर से पूरी तरह अलग होता है क्योंकि फ्रीलांसर किसी कंपनी के नियमित कर्मचारी नहीं होते और कंपनियां उन्हें सिर्फ काम का मेहनताना देती हैं। हालांकि नियमित कर्मचारियों को वेतने के अतिरिक्त कई अन्य भत्ते कंपनियां देती हैं। एक कंपनी से नियमित वेतन हासिल करने के साथ दूसरे प्रोजेक्ट में काम करने पर इंडस्ट्री में कई लोगों को आपत्ति है। 
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कोरोना काल में बढ़ी मूनलाइटिंग
कोरोना काल के साथ ही देश में मूनलाइटिंग बढ़ी है क्योंकि उस दौरान सैलरी घटने या नौकरी छूटने से लोग अतिरिक्त आय के लिए हाथ पैर मार रहे थे। तो दूसरी तरफ छोटी कंपनियां लागत घटाने के लिए प्रोजेक्ट के आधार पर काम ऑफर कर रही थीं जिससे मूनलाइटिंग का चलन काफी बढ़ गया। 

महामारी के बाद से कई नए ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं, इन्ही नए ट्रेंड में से मूनलाइटिंग एक है। बताया जा रहा है कि जहां एक ओर कुछ कंपनियां इस नए वर्क सिस्टम को सपोर्ट कर रही हैं, वहीं कई बड़ी और टेक कंपनियां इसका विरोध कर रही हैं। 

विप्रो के रिशद प्रेमजी मूनलाइटिंग को बताया कंपनी के साथ धोखा
हाल ही में विप्रो के चेयरमैन रिशद प्रेमजी द्वारा मूनलाइटिंग का जिक्र किए जाने के बाद से इस टर्म पर खूब चर्चा हो रही है। रिशद ने मून लाइटिंग को नियोक्ता कंपनी के साथ धोखा बताया था। वहीं टेक, महिंद्रा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीपी गुरनानी ने हाल ही में एक ट्वीट में कहा कि समय के साथ बदलते रहना जरूरी है और हम जिस तरह से काम करते हैं, उसमें व्यवधान का मैं स्वागत करता हूं। 

इंफोसिस के पूर्व निदेशक मोहनदास पई ने क्या कहा?
इंफोसिस के पूर्व निदेशक और आईटी उद्योग के जाने-माने शख्स मोहनदास पई ने इसको लेकर कहा कि टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में शुरुआती दौर में कम वेतन होना मूनलाइटिंग की एक वजह है। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान सबकुछ डिजिटल हो गया और गिग रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई। यदि आप लोगों को अच्छी तरह से भुगतान नहीं करते हैं और वे अधिक पैसा कमाना चाहते हैं तो यह अच्छी कमाई का आसान तरीका है। लोगों को लगता है कि अब तकनीक उपलब्ध है। डॉलर में बहुत अच्छा भुगतान मिलता है, मैं और अधिक कमा सकता हूं। 
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