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राज्यों का हाल: कैश की सप्लाई बहुत कम, बैंक हुए बेबस

Thu, 01 Dec 2016 11:02 AM IST
लखनऊ/ देहरादून/ हरियाणा/जम्मू/शिमला
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नोटबंदी से पैदा हुई कैश की किल्लत से निजात दिलाने के केंद्र सरकार के तमाम दावे फिलहाल हवाई ही साबित हुए हैं। असल परेशानी तो आज महीने की पहली तारीख से खड़ी होगी। निजी और सरकारी कर्मचारियों का वेतन उनके बैंक खातों में पहुंचने लगेगा। राशि तो खातों में पहुंच जाएगी लेकिन लोगों के हाथ खाली ही रहेंगे क्योंकि रिजर्व बैंक से नए नोटों की सप्लाई बहुत कम है। ऐसे में बैंक भी कुछ नहीं कर पाएंगे।
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उत्तर प्रदेश में एक दिसंबर को राज्यकर्मियों को मिलने वाले वेतन भुगतान के लिए फिलहाल अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने निदेशक कोषागार सहित बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रबंध करें कि एक दिसंबर को कर्मचारियों को अपने खाते से भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के अनुसार आवश्यक धनराशि निकालने में कोई दिक्कत न हो। संबंधित बैंकों को नई करेंसी की पर्याप्त व्यवस्था रखने को कहा गया है। केंद्र व कुछ अन्य राज्यों की तरह नकद वेतन देने की फिलहाल कोई व्यवस्था किए जाने के संकेत नहीं हैं।

उत्तराखंड के ज्यादातर बैंक छोटे और नए नोटों की किल्लत से जूझ रहे हैं। ऐसे में एक तारीख को जिनके खाते में वेतन आता है, उन्हें मायूस ही होना पड़ेगा। क्योंकि 50 और 100 के छोटे नोटों के साथ ही 500 और 2000 के नए नोट भी बैंक शाखाओं पर कम ही उपलब्ध हैं। बैंक सूत्रों के अनुसार तीन दिन पहले पीएनबी में पांच करोड़ की करेंसी आई थी। उसके बाद से करेंसी नहीं पहुंची। हालांकि बैंक अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही करेंसी आ जाएगी।
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हरियाणा के ढाई लाख कर्मियों को कैश की चिंता सता रही है। कैशलेस लेनदेन और नए खाते खोलने के लिए राज्य सरकार कैंपेन की शुरुआत करेगी। बैंक के अधिकारी श्रमिकों के पास जाकर उनका खाता खुलवाएंगे और कैशलेस लेनदेन केबारे में जानकारी देंगे। रुपे कार्ड और जनधन खाते के संचालन में कोई दिक्कत न आए इसके लिए भी बैंकरों को निर्देश दिए गए हैं। 
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सैलरी अकाउंट से निकासी का नहीं मिला है कोई दिशा-निर्देश

सर्व कर्मचारी संघ की मांग पर कर्मचारियों को दस हजार रुपये एडवांस दिए जाने का निर्णय लिया गया था लेकिन वेतन मिलने के बाद उस दस हजार रुपये एडवांस का अब तक इंतजार है। कैश की परेशानी की वजह से बैंकों और एटीएम और शाखा में खाताधारकों को घंटों लाइन में लगना पड़ेगा। इससे जहां कर्मचारियों की परेशानी बढ़ेगी तो दूसरी तरफ सरकारी कामकाज भी प्रभावित होगा। कर्मचारियों को यह चिंता सता रही है कि कैश निकालने के लिए यदि वे लाइनों में खड़े होते हैं तो उनकी ड्यूटी भी प्रभावित होगी।

पंजाब, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भी कैश की सप्लाई, डिमांड के मुकाबले बहुत कम चल रही है। सभी राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों में कैश की किल्लत है। बुधवार को भी सभी जगह ग्राहकों की लाइनें लगी रहीं। अब बैंक अधिकारी इस चिंता में हैं कि बृहस्पतिवार को लोगों का वेतन आएगा तो क्या होगा। कैश की सप्लाई बढ़ने के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। 

जम्मू-कश्मीर में एक बैंक के अधिकारी ने बताया कि सैलरी अकाउंट के लिए भी धन निकासी संबंधी कोई नया निर्देश नहीं मिला है। पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने बैंकरों से कहा है कि ग्रामीण इलाकों में कैशलेस ट्रांसेक्शन के प्रति लोगों को जागरूक किया जाए। दूसरी ओर सरकार की सहयोगी भाजपा का कहना है कि अभी कुछ और दिन लोगों को समस्या आ सकती है।

हिमाचल के बैंकों ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से 600 करोड़ रुपये मांगे हैं। दो दिन में इस राशि के पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त श्रीकांत बाल्दी ने बताया कि लंबे समय से हिमाचल सरकार आरटीजीएस के माध्यम से कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन डाल रही है। अब लाखों कर्मचारियों को कैश में वेतन दे पाना संभव नहीं है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों तक ऐसा कर पाना अब नामुमकिन है। भले बैंकों को लिखा जा चुका है कि वे कर्मचारियों को किसी तरह की समस्या न आने दें।
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