सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में जबरदस्त हंगामा होने के आसार हैं। विपक्ष केंद्र सरकार को पेट्रोल-डीजल और गैस की लगातार बढ़ती कीमतों पर घेरने की कोशिश करेगा। सत्र 19 जून से 13 अगस्त तक चलेगा। सरकार इसमें 17 नए विधेयक पारित कराना चाहती है, जो उसके लिए चुनौतीपूर्ण होगा।
सत्र के दौरान कोरोना मामलों पर सरकार की नीति, यूपी सरकार द्वारा प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून, किसानों का आठ महीने से जारी प्रदर्शन सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की वजह बन सकता है। विपक्ष सरकार से डोकलाम के मुद्दे पर सफाई की मांग कर सकता है। राहुल गांधी कोविड मामलों के प्रबंधन पर सरकार को लगातार घेरने की कोशिश करते रहे हैं। उन्होंने कोरोना मामले बढ़ने को लेकर लगातार सवाल उठाए हैं। संसद में कांग्रेस इन बिंदुओं के साथ वैक्सीन की उपलब्धता पर सरकार को घेर सकती है। कांग्रेस लगातार बढ़ती पेट्रोल कीमतों के विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन कर रही है। वह संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश अवश्य करेगी।
कांग्रेस नेता शशि थरूर यूपी सरकार के जनसंख्या नियंत्रण कानून को एक वर्ग विशेष के खिलाफ बता चुके हैं। उन्होंने इसे समाज को बांटने वाली कोशिश भी बताया है। कांग्रेस पार्टी इसके लिए एक रणनीति के तहत इस मुद्दे पर भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को घेर सकती है। इसी मुद्दे पर छह भाजपा सांसदों और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्राइवेट मेंबर बिल लाकर चर्चा कराने की मांग की है।
किसान नेताओं ने सभी दलों से आग्रह किया है कि वे संसद का बहिष्कार न करें। बल्कि वे संसद में रहकर सरकार के 'काले कानूनों' का विरोध करें। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने किसानों की मांगों का समर्थन किया है। 26 नवंबर 2020 से शुरू हुए किसान आंदोलन को अब आठ महीने पूरे होने जा रहे हैं। पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे महत्त्वपूर्ण राज्यों में चुनाव के कारण इस मुद्दे पर हंगामा बढ़ सकता है।
सरकार ने कई अध्यादेश भी जारी किए हैं। इनसे संबंधित विधेयकों को भी इसी सत्र में पास कराना उसके लिए बड़ी चुनौती होगा। इसमें रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विभागों में कर्मियों के हड़ताल के अधिकार को खत्म करने का अध्यादेश भी शामिल है। श्रमिक वर्ग इसे अपने मौलिक अधिकार का हनन बताते हुए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
सहमति बनाने की कोशिश
सरकार को भी संसद की इस स्थिति का भरपूर अनुमान है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष के नेताओं से मिलकर संसद के सुचारू रूप से चलाने पर बातचीत कर चुके हैं। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सत्र को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने का अनुरोध किया है तो केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद पीयूष गोयल ने विपक्ष के नेताओं से मिलकर संसद की कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से आगे ब़ढ़ाने में विपक्ष का सहयोग मांगा है।